नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नरेंद्र मोदी का सेवा काल किसानों के लिए स्वर्णकाल है। वर्ष 2014-15 में देश का कृषि बजट 25.5 हज़ार करोड़ था जो 2024-25 में ₹1 लाख 22,528 करोड़ हुआ। वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को बजट में 1.37 लाख करोड़ के बजट का प्रावधान किया है। यह धनराशि यूपीए के कार्यकाल के मुकाबले पांच गुना से ज्यादा है। इस बार के कृषि बजट में भी किसानों का विशेष ध्यान रखा गया है। एनडीए के कार्यकाल में कृषि अवसंरचना कोष के तहत 1 लाख करोड़ रुपए का निवेश कर कृषि सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि इस बार के बजट में केसीसी की ऋण सीमा को भी 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है। इसका फायदा देश के 7.75 करोड़ केसीसी धारक किसानों को होगा। देश के 24 करोड़ से ज्यादा किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिया जा चुका है। जिससे उनकी बहुत बचत हुई है। 100 पर्सेंट नीम कोटेड यूरिया से यूरिया की कालाबाजारी रुकी और किसानों को उचित दर पर उपलब्ध हो सकी। परंपरा कृषि विकास योजना के तहत के तहत 1980 करोड़ का फंड देश के 8.13 लाख किसानों को दिया गया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि पिछले दस सालों में 6500 करोड़ रुपए किसानों को कृषि मशीनरी खोलने के लिए दिए गए हैं। इनाम ऐप पर 1.7 करोड़ किसान और 2.6 लाख ट्रेडर अपने आप को रजिस्ट्री कर चुके हैं, जिससे किसानों को सीधे बाजार मिल रहा और वह सरकार की निगहबानी में निश्चिंत होकर अपने सभी प्रोडक्ट्स बेच रहे हैं। इसी के चलते पिछले दस सालों में देश में खाद्यान्न उत्पादन डेढ़ गुना बढ़कर 329 मिलियन टन हुआ।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश के किसानों को सब्सिडी पर फर्टिलाइजर्स उपलब्ध हो सके इसके लिए पिछले दस सालों में 11 लाख करोड़ रुपए भारत सरकार ने खर्च किए हैं। देश में पहले बार 22 फसलों की एमएसपी उनके लागत का से 50 प्रतिशत अधिक रखी गई है। पिछले दस सालों में ज्वार- बाजरा समेत कई फसलों के एमएसपी में दो गुना की वृद्धि हुई है। पिछले दस सालों में देश के किसानों को गेहूं और धान की फसलों के एमएसपी के लिए 18 लाख करोड़ रुपए का डीबीटी किया है। यह राशि कांग्रेस सरकार के मुक़ाबले ढाई गुना से ज़्यादा है। तिलहन और दलहन की फसलों पर मोदी सरकार ने 1.25 लाख करोड़ रुपए एमएसपी पर खर्च किए हैं।