शुक्रवार को जारी प्रेस बयान में जयराम ठाकुर ने कहा इस मामले में भले ही हाईकोर्ट ने अधिकारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के स्थानांतरण फैसले को रद्द कर दिया हो, लेकिन समय पर प्रोजेक्ट पूरा न कर रहे ठेकेदार को एक नोटिस देना किसी भी अधिकारी को कितना भारी हो सकता है, यह मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को बता दिया है।
उन्होंने कहा कि कार्य समय से पूरा नहीं होता है तो अधिकारी नोटिस देते हैं, बदले में ठेकेदार को काम समय से पूरा करना होता है और उस पर पेनल्टी लगाई जाती है, यह व्यवस्था की बात है। लेकिन व्यवस्था परिवर्तन में यदि परियोजना से जुड़े अधिकारी ठेकेदार को काम सही से और समय से करने को कहें तो ठेकेदार मुख्यमंत्री को सीधे पत्र लिखकर कहता है कि इस अधिकारी को सबक सिखाओ और अगले दिन अधिकारी को दूर दराज के जिलों में भेज कर सबक सिखा दिया जाता है। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश को ऐसा व्यवस्था परिवर्तन नहीं चाहिए जो भ्रष्टाचार को न सिर्फ जन्म देता हो बल्कि उसका पालन पोषण और संरक्षण करता हो।