नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने विभिन्न समय पर ट्रामा सेंटर के लिए अलग-अलग पदों पर जिसमें सपोर्टिव स्टाफ और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल है के लिए भर्तियां निकाली और आउट सोर्स के माध्यम से उन्हें भरा गया। सूचना के अधिकार के तहत हासिल किए गए डॉक्यूमेंट के आधार पर पता चलता है कि रेडियो ग्राफर, फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय ट्रॉली मैन सफाई कर्मचारी के कुल 126 पदों पर अलग-अलग समय में नियुक्तियां हुई। हैरानी की बात है कि जो ट्रॉमा सेंटर आज फंक्शनल हुआ है उसके लिए कई महीनों या साल भर पहले से ही कर्मचारियों की नियुक्ति का क्या औचित्य है?
इसके साथी प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को इस बात का भी जवाब देना चाहिए कि उन्होंने ट्रॉमा सेंटर को फंक्शनल करने में 19 महीने का वक्त क्यों लगाया? क्या बने बनाए प्रोजेक्ट का बार-बार फीता काटना ही व्यवस्था परिवर्तन था। जहां केन्द्र सरकार के कामों का फीता काटा जाए और केंद्र सरकार को कोसा जाए। क्योंकि जो पैसा सरकार घोटाले के माध्यम से उड़ाया जा रहा है वह भी केंद्र सरकार से आया है और जिस पैसे से ट्रामा सेंटर और कैंसर टर्शरी सेंटर बन रहा है वह भी केंद्र सरकार का है। सरकार बस फीता कटर बनकर फीता काटे जा रही है।