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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा: राजा की चानणी से निकली नरसिंह की जलेब, झूमे देवलू, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

Fri, 23 Oct 2026 07:29 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

ढोल-नगाड़ों, करनाल और शहनाई की गूंज के बीच निकली जलेब में देवलू पारंपरिक लोक धुनों पर जमकर झूमे। देवताओं के जयकारों और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा ढालपुर देवमय हो गया। 
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चानणी से निकली नरसिंह की जलेब। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के तीसरे दिन शुक्रवार को देव परंपरा के अनुसार भगवान नरसिंह की दूसरी जलेब निकाली गई। ढोल-नगाड़ों, करनाल और शहनाई की गूंज के बीच निकली जलेब में देवलू पारंपरिक लोक धुनों पर जमकर झूमे। देवताओं के जयकारों और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा ढालपुर देवमय हो गया। जलेब के दर्शन के लिए सड़कों के दोनों ओर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ी। शाम 4:18 बजे के बाद राजा की चानणी से शुरू हुई जलेब में गड़सा घाटी सहित विभिन्न क्षेत्रों के देवताओं ने अपने लाव-लश्कर के साथ भाग लिया। जलेब की अगुवाई भगवान नरसिंह की घोड़ी ने की।

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इसके पीछे देवताओं का भव्य काफिला आगे बढ़ा। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी पालकी में सवार होकर जलेब में शामिल हुए। सजे-धजे रथों और पालकियों में विराजमान देवी-देवताओं के दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हुए। जलेब राजा की चानणी से शुरू होकर कॉलेज चौक, पुराने एसबीआई पार्क और कला केंद्र के पीछे से होते हुए ढालपुर चौक तक पहुंची। इसके बाद जलेब वापस राजा की चानणी में पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे रास्ते में लोगों ने देवताओं की भव्य शोभायात्रा को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर देवलुओं का नृत्य जलेब का मुख्य आकर्षण रहा। देव मान्यता के अनुसार भगवान नरसिंह दशहरा उत्सव के दौरान पूरे ढालपुर मैदान में रक्षा सूत्र बांधते हैं। भगवान नरसिंह को भगवान रघुनाथ का रक्षक माना जाता है। जलेब के समापन के बाद सभी देवी-देवता अपने-अपने अस्थायी शिविरों में लौट गए। 
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