इसके पीछे देवताओं का भव्य काफिला आगे बढ़ा। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी पालकी में सवार होकर जलेब में शामिल हुए। सजे-धजे रथों और पालकियों में विराजमान देवी-देवताओं के दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हुए। जलेब राजा की चानणी से शुरू होकर कॉलेज चौक, पुराने एसबीआई पार्क और कला केंद्र के पीछे से होते हुए ढालपुर चौक तक पहुंची। इसके बाद जलेब वापस राजा की चानणी में पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे रास्ते में लोगों ने देवताओं की भव्य शोभायात्रा को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर देवलुओं का नृत्य जलेब का मुख्य आकर्षण रहा। देव मान्यता के अनुसार भगवान नरसिंह दशहरा उत्सव के दौरान पूरे ढालपुर मैदान में रक्षा सूत्र बांधते हैं। भगवान नरसिंह को भगवान रघुनाथ का रक्षक माना जाता है। जलेब के समापन के बाद सभी देवी-देवता अपने-अपने अस्थायी शिविरों में लौट गए।