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हाईकोर्ट ने कहा, भारत-पाक मैच को सुरक्षा दे सरकार

Fri, 04 Mar 2016 10:44 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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धर्मशाला में भारत-पाक मैच का विवाद शुक्रवार को अदालत की चौखट तक पहुंच गया। हिमाचल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार से कहा कि वह इस मैच में सुरक्षा प्रदान करे। यह राज्य की जिम्मेदारी है। उधर, मुख्यमंत्री ने कहा-सरकार मैच को सुरक्षा देने के लिए राजी है लेकिन वह प्रदर्शनकारी पूर्व सैनिकों पर लाठी नहीं चला सकती।
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पूर्व सैनिकों के नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया मैच के विरोध में अड़े हैं। गोरखा समुदाय के लोगों ने भी मैच के विरोध में धर्मशाला में प्रदर्शन किया। बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर वेट एंड वॉच के मोड में आ गए हैं। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने शुक्रवार को मैच कराने के लिए मुख्यमंत्री से पैरवी की। मैच पर आशंकाओं के बादल बरकरार हैं।

हिमाचल हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार धर्मशाला में होने वाले भारत- पाक टी-20 क्रिकेट मैच के लिए सुरक्षा मुहैया कराए। कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने ये निर्देश एक जनहित याचिका पर दिए।
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याचिका में शिमला निवासी सुधीर प्रकाश डोगरा ने 19 मार्च को होने वाले भारत-पाक मैच के दौरान राज्य सरकार को उचित सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के आदेश देने की गुहार लगाई थी। प्रार्थी ने मैच के दौरान बाधा डालने वालों को रोकने के लिए आदेश देने की भी गुहार की थी।

प्रार्थी ने बताया है कि यह पहली बार नहीं है जब देश में भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच हो रहा है। 2005 में भी दोनों देशों के बीच मैच हुआ था। याचिका में आरोप लगाया गया कि सरकार केवल राजनीतिक कारणों से सुरक्षा का मुद्दा बना रही है। यह बड़े गर्व की बात है कि प्रदेश में ऐसे बड़े मैच का आयोजन हो रहा है।

इस मैच के सफल आयोजन से प्रदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएगा। प्रार्थी का कहना था कि इस मैच की तारीख एक साल पहले ही तय हो चुकी थी, इसलिए हाल की आतंकी घटनाओं का बहाना बनाकर इस मैच को धर्मशाला से स्थानांतरित करना प्रदेश हित में नहीं होगा।

मैच को अंत समय में रद्द करना भी देश की छवि को खराब कर सकता है। सरकार की तरफ से भी कहा गया कि वह मैच में सुरक्षा बनाए रखने में सक्षम है। सरकार के पक्ष सुनने के बाद याचिका का निपटारा करते हुए सरकार को आदेश दिए कि वह राज्य में सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था बनाए रखे।

याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार आतंकी घटनाओं में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों की ओर से मैच का विरोध करने की बात भी प्रचारित की जा रही है, जिस कारण मैच के आयोजन पर संशय बना हुआ है।


धर्मशाला में भारत-पाक मैच के लिए सुरक्षा देने को लेकर हिमाचल सरकार एक कदम आगे बढ़ा कर दो कदम पीछे हट गई। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शुक्रवार को फिर दोहराया कि वह भारत पाक मैच के खिलाफ नहीं। न ही वह सुरक्षा देने को मना कर रही है लेकिन मैच के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले पूर्व सैनिकों पर वह लाठी नहीं चला सकती।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत-पाक मैच के लिए सुरक्षा देने में राज्य सरकार को कोई दिक्कत नहीं है मगर प्रदेश पुलिस पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों पर लाठीचार्ज नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इस मैच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे शहीदों के परिवारों की भावनाओं को ध्यान में रखने की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री प्रदेश विधानसभा परिसर में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे।

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेवारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है मगर वे प्रदेश की पुलिस का इस्तेमाल शहीद परिवारों और पूर्व सैनिकों के खिलाफ नहीं कर पाएंगे। शिवसेना के मुख पत्र ‘सामना’ में उनकी तारीफ पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बोले कि भाजपा और शिवसेना में कुछ नेता राष्ट्रवादी हैं। बाकी सब लकीर के फकीर हैं। प्रदेश विधानसभा में भाजपा के वाकआउट पर कहा कि भाजपा हर बार ऐसा करती है।

बीसीसीआई के वरिष्ठ पदाधिकारी राजीव शुक्ला ने धर्मशाला में भारत-पाक क्रिकेट मैच पर हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से भी फोन पर बात की है। सूत्रों की मानें तो राजीव शुक्ला ने कहा कि अगर धर्मशाला में मैच नहीं होता है तो ये कमिटमेंट के खिलाफ होगा। मैच के रद्द होने पर आईसीसी की ओर से सख्त कार्रवाई हो सकती है।

उन्होंने कहा कि अब मैच का स्थान बदलने की गुंजाइश नहीं है। वहीं, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसी पर कहा कि सरकार मैच के खिलाफ नहीं है। मैच के लिए सुरक्षा मुहैया करवाने में भी कोई दिक्कत नहीं है, मगर वे अपनी पुलिस को शहीदों के खिलाफ लाठीचार्ज के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते।
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