प्रदेश की संस्कृति को दर्शातीं 14 कांगड़ा कलम की पेंटिंग्स
प्रदर्शनी में दुर्लभ कांगड़ा कलम शैली की 14 विशेष पेंटिंग्स भी प्रदर्शित की गई हैं। इन चित्रों में प्रदेश की संस्कृति और गांवों के जीवन के विभिन्न चरणों को कलात्मक रूप में दर्शाया गया है। पेंटिंग्स में गीत की रचना, राष्ट्रीय चेतना के प्रसार और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका को दृश्य रूप दिया गया है। पारंपरिक कांगड़ा चित्रकला शैली में तैयार ये कृतियां प्रदर्शनी को ऐतिहासिक होने के साथ कलात्मक आयाम भी देती हैं और दर्शकों को इतिहास को चित्रों के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान करती हैं।
पटेल ने सैकड़ों रियासतों को एक संगठित गणराज्य में परिवर्तित किया : उपराष्ट्रपति
खराब मौसम के कारण उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शिमला नहीं पहुंच सके। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। कहा कि देश इस वर्ष वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है। ऐसे अवसर केवल इतिहास को याद करने के लिए नहीं, बल्कि उसके मूल्यों और आदर्शों से दोबारा जुड़ने का अवसर भी हैं। उन्होंने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की सराहना की। ऐसे आयोजन राष्ट्रीय चिंतन को नई दिशा देते हैं। कहा कि नवाचार किसी राष्ट्र को समृद्ध बना सकते हैं, लेकिन किसी महान राष्ट्र की वास्तविक नींव उसके विचारों पर टिकी होती है। स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम ने विभिन्न भाषाओं, क्षेत्रों, धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों को एक साझा राष्ट्रीय उद्देश्य से जोड़ा। सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वंदे मातरम ने राष्ट्र के जन्म को प्रेरित किया, जबकि सरदार पटेल ने सैकड़ों रियासतों को एक संगठित गणराज्य में परिवर्तित किया।
भारतीय संघवाद के मजबूत प्रवक्ता थे पटेल : राज्यपाल
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल केवल भारत के राजनीतिक एकीकरण के शिल्पकार नहीं थे, बल्कि भारतीय संघवाद के मजबूत प्रवक्ता भी थे। कहा कि भारत की भाषायी, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता ही उसके संघीय ढांचे की सबसे बड़ी शक्ति है। सरदार पटेल का योगदान केवल 560 से अधिक रियासतों के एकीकरण तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने एक मजबूत और संगठित भारत की आधारशिला रखी। आईआईएएस के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि सरदार पटेल ने आधुनिक भारत की प्रशासनिक और संघीय व्यवस्था को मजबूत आधार दिया और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। आईआईएएस की अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार ने संस्कृत श्लोक के साथ स्वागत भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि भारत की एकता हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा की देन है। कार्यक्रम में वंदे मातरम् पर आधारित कॉफी टेबल बुक और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर आधारित बहुभाषी काव्य संग्रह का विमोचन भी किया गया। समारोह में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना, प्रधान महालेखाकार पुरुषोत्तम तिवारी, संस्थान के सचिव मेहर चंद नेगी, देशभर से आए शिक्षाविद, राष्ट्रीय अध्येता और विभिन्न क्षेत्रों की अनेक गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं।