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आईजीएमसी शिमला के शोध में खुलासा: चिप्स, नूडल्स के नाम पर बिक रहे मिलेट्स फूड में फाइबर और मिनरल गायब

Sat, 17 Oct 2026 06:15 AM IST
Krishan Singh आदित्य सोफत, शिमला।

सार

मिलेट्स फूड को रासायनिक और कई मशीनरी प्रक्रिया से गुजारने के बाद रेडी टू ईट बनाया जा रहा है। इनमें स्वाद और आकर्षक रंग बढ़ाने के लिए पाम ऑयल, आर्टिफिशियल फ्लेवर और उच्च तापमान का इस्तेमाल भी किया जाता है। ऐसे उत्पादों को स्वास्थ्यवर्धक बताकर महंगे दामों पर बेचा जा रहा है।
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रेडी टू ईट बनाने से खत्म हो रहे मिलेट्स फूड के पोषक तत्व। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 हेल्दी मिलेट्स (मोटा अनाज) के नाम पर बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थ सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। बाजार में इन्हें अल्ट्रा प्रोसेस कर मिलेट्स कुरकुरे, चिप्स, बिस्कुट, नूडल्स, सूप बनाकर बेचा जा रहा है। मिलेट्स फूड को रासायनिक और कई मशीनरी प्रक्रिया से गुजारने के बाद रेडी टू ईट बनाया जा रहा है। इनमें स्वाद और आकर्षक रंग बढ़ाने के लिए पाम ऑयल, आर्टिफिशियल फ्लेवर और उच्च तापमान का इस्तेमाल भी किया जाता है। ऐसे उत्पादों को स्वास्थ्यवर्धक बताकर महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के चिकित्सक डॉ. अमित सचदेवा के शोधपत्र में मिलेट्स की प्रोसेसिंग से जुड़े इन पहलुओं को सामने रखा गया है। 

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रेडी टू ईट खाद्य पदार्थ बनाने से आवश्यक पोषक तत्व खत्म:  शोध
 शोधपत्र के अनुसार रेडी टू ईट खाद्य पदार्थ बनाने से आवश्यक पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं और हेल्दी मिलेट्स फूड बताए गए पदार्थ सेहत सुधारने की बजाय बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। इसमें न केवल फाइबर और मिनरल की कमी होती है बल्कि विटामिन व अन्य पोषक तत्व भी न के बराबर रह जाते हैं। दूसरी ओर, पैकेट बंद दलिया व अन्य मोटे अनाज की चमक बढ़ाने को की जा रही पॉलिशिंग भी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। यह भी सामने आया है कि मिलेट्स से बना आटा व अन्य पदार्थों में भी कई प्रकार की कमियां हैं। कारखानों में मोटे अनाज से बनाए आटे को पकाने में आसान बनाने के लिए ऊपरी चोकर, अंकुर व अन्य बाहरी परतों को पूरी तरह छील दिया जाता है। इससे प्राकृतिक फाइबर और माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स नष्ट हो जाते हैं और सिर्फ स्टार्च बचता है।
 

सामान्य तरह से उपलब्ध चीजें ही बेहतर
मोटे अनाज में आयरन, कैल्शियम, विटामिन, फाइबर समेत अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में उपलब्ध होते हैं। यह मोटापा, शुगर और गंभीर बीमारियों से भी बचाते हैं। बाजरा, ज्वार, कंगनी, रागी, चना, कोदा समेत अन्य मोटा अनाज को आटा फॉर्म या प्राकृतिक रूप में खाना बेहतर होता है। मशीनों से गुजारने के बाद इसका अल्ट्रा प्रोसेस शुरू हो जाता है।
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क्या बोले विशेषज्ञ
मोटे अनाज की अत्यधिक प्रोसेसिंग से फाइबर की मात्रा घट सकती है। इससे शुगर और अन्य कंटेंट बढ़ जाते हैं। इससे मोटापा, हार्ट अटैक समेत आजीवन बीमारियां बढ़ जाती हैं। इसी के साथ अल्ट्रा प्रोसेस करने से खाद्य पदार्थ की लाइफ घट जाती है। इसके प्रयोग से बचना चाहिए। प्राकृतिक रूप से तैयार आटा और दलिया में भरपूर पोषक तत्व होते हैं।-नेहा शर्मा, डाइटिशियन, कमला नेहरू अस्पताल शिमला।

बाजार में मिलेट्स के नाम पर बिकने वाले महंगे और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। कई पदार्थों में पॉलिशिंग और अत्यधिक प्रोसेसिंग से फाइबर और मिनरल्स खत्म हो जाते हैं। बाजरा, रागी, ज्वार, कंगनी हाई-फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं लेकिन जब इन्हें कंपनियों में रासायनिक तरीकों से गुजार कर रेडी टू ईट या पैकेट बंद प्रोडक्ट्स बनाया जाता है, तब अल्ट्रा प्रोसेस्ड बन जाते हैं। -डॉ. अमित सचदेवा, सहायक प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन, आईजीएमसी, शिमला
 
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