उधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने नामांकन जांच प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है और दोबारा स्क्रूटनी कराने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार जल शक्ति विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत अनिल कुमार ने पंचायत कोपड़ा के प्रधान पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। सहायक अभियंता जल शक्ति विभाग ने रिटर्निंग अधिकारी को सूचित किया कि संबंधित कर्मचारी सरकारी सेवा में कार्यरत है और कार्यालय में उपस्थित भी नहीं हो रहा है। इसके बावजूद उसका नाम उम्मीदवारों की सूची में शामिल कर चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिया गया।
वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के दौरान रोहडू विकास खंड की पंचायत दलगांव में उम्मीदवारों की सूची और चुनाव चिह्न आवंटन से जुड़े मामले में विशेष आदेश जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्याशियों के क्रम और उन्हें आवंटित चुनाव चिह्नों को यथावत रखा जाएगा, जिससे मतदाताओं में किसी प्रकार का भ्रम न फैले।
आयोग ने दलगांव में प्रधान पद के लिए सहायक रिटर्निंग अधिकारी की ओर से प्रत्याशियों की सूची वर्णानुक्रम के अनुसार तैयार नहीं की गई थी। इसके चलते सहायक रिटर्निंग अधिकारी को निलंबित किया है। आयोग के संज्ञान में यह मामला आने के बाद इसकी समीक्षा की गई। आयोग ने माना कि संबंधित प्रत्याशी पहले ही आवंटित चुनाव चिह्नों के आधार पर चुनाव प्रचार शुरू कर चुके हैं। ऐसे में यदि अब चुनाव चिह्न या उम्मीदवारों के क्रम में बदलाव किया जाता है तो मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने न्यायसंगत और निष्पक्ष व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से जारी फॉर्म-24 में दर्ज प्रत्याशियों के क्रम और चुनाव चिह्नों को वैध घोषित कर दिया है।