पॉलिटेक्निक संघ ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की सिफारिशों के अनुसार वेतन दिया जाए या कम से कम पंजाब के समकक्षों के बराबर वेतनमान प्रदान किया जाए। साथ ही मांग की थी कि राज्य सरकार की ओर से 20 अगस्त 2013 को जारी किए गए उस निर्णय को रद्द किया जाए जिसमें उन्हें चार स्तरीय वेतनमान देने से इन्कार कर दिया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अन्य सेवाओं जैसे कि वन सेवा को पंजाब तर्ज पर लाभ दिया गया है, लेकिन पॉलिटेक्निक शिक्षकों को इससे वंचित किया गया।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि भले ही वह पंजाब के वेतन पैटर्न पर विचार कर सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह से लागू करने को बाध्य नहीं है। वेतन निर्धारण करते समय वह अपने वित्तीय संसाधनों, भौगोलिक परिस्थितियों और सेवा नियमों को ध्यान में रखती है। चार स्तरीय वेतनमान का मामला मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया था। विचार विमर्श करने के बाद पाया गया कि चार स्तरीय वेतनमान लागू करने से न केवल वित्तीय बोझ बढ़ेगा बल्कि पदानुक्रम में असंतुलन आएगा, क्योंकि इससे नौ साल की सेवा के बाद शिक्षक उपायुक्त से अधिक वेतन पाने लगेंगे।