इस मामले में सुनवाई के दौरान, माननीय न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले, मनोज और अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य का हवाला दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के उक्त फैसले में, विशेष रूप से पैराग्राफ 250 और 251 में, यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब किसी आरोपी के लिए मृत्युदंड की सजा की मांग की जाती है, तो सजा सुनाए जाने के चरण में कुछ विस्तृत जानकारी अनिवार्य रूप से अदालत को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। फैसले में कहा गया है कि आरोपी की सजा को सभी कम करने वाली परिस्थितियों को स्थापित करने के लिए खंडन में सबूत पेश करने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि शिमला में 2014 में चार साल के मासूम बच्चे युग का तीन लोगों ने अपहरण किया था। फिर पत्थर से बांधकर उसे पानी के टैंक में फेंककर उसकी हत्या कर दी थी। तीनों दोषियों को जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने फांसी की सजा दी है। दोषियों में चंद्र शर्मा, तेजेंद्र पाल और विक्रांत शामिल हैं। जिला अदालत के इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट की खंडपीठ काफी लंबे समय से मामले को सुन रही है जो कि अब लगभग पूरी हो चुकी है। जैसे ही अपीलकर्ताओं की ओर से दायर रिपोर्टों पर जवाब दायर करेगी,उसके बाद मामले में सुनवाई के लिए शेष कुछ नहीं बचेगा और बहुत जल्द मामले में फैसला आ जाएगा।