बारिश-भूस्खलन के चलते प्रदेश में अभी भी आनी-कुल्लू हाईवे समेत 362 सड़कें बंद हैं। शिमला-कालका एनएच रातभर रहा अवरुद्ध रहा, जबकि चंडीगढ़-मनाली हाईवे शनिवार को 18 घंटे बाद बहाल हुआ। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को भी प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 11 से 14 अगस्त तक भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
मंडी में पंडोह से औट तक जगह-जगह भूस्खलन के चलते चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे शनिवार को 18 घंटे बाद बहाल हुआ। कालका-शिमला एनएच-5 भी रात भर अवरुद्ध रहा। कड़ी मशक्कत के बाद सुबह चार बजे यातायात बहाल हुआ। रातभर सेब के ट्रक फंसे रहे। चक्कीमोड़ में वनवे ट्रैफिक के कारण शनिवार को भी जाम की स्थिति बनी रही। सड़कें बंद होने के कारण सेब रास्ते में अटक गया है। अपर शिमला और कुल्लू में कई जगह ट्रक फंसे हैं। कई इलाकों में सेब तुड़ान रुक गया है। फल और सब्जियां मंडी तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। शनिवार तक प्रदेश भर में 613 बिजली के ट्रांसफार्मर और 520 पेयजल योजनाएं बंद रहीं।
आपदाग्रस्त मंडी जिले में अभी भी 220 सड़कें, 202 बिजली के ट्रांसफार्मर और 78 जल आपूर्ति योजनाएं बाधित हैं। कुल्लू जिले में 91 सड़कें, 393 बिजली ट्रांसफार्मर व 367 जल आपूर्ति स्कीमें बंद हैं। आनी-कुल्लू नेशनल हाईवे-305 लारजी से लेकर बंजार तक जगह-जगह बंद रहा। बसों के लिए चार दिन बाद खुलने के 20 घंटों के भीतर ही यह हाईवे फिर बंद हो गया है। रामपुर-रोहडू सड़क भद्राश के समीप भूस्खलन से 15 घंटे बंद रही। बता दें कि 20 जून को मानसून की शुरुआत के बाद से, हिमाचल प्रदेश में 1,988 करोड़ रुपये के नुकसान की सूचना दी है। प्रदेश में अब तक 58 बाढ़, 30 बादल फटने और 53 बड़े भूस्खलन हुए हैं।
मानसून सीजन में 1988 करोड़ का नुकसान, 219 लोगों की गई जान
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में 20 जून से 9 अगस्त तक 219 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। प्रदेश में 315 लोग घायल हुए हैं, जबकि 37 लोग अभी भी लापता हैं। इस दौरान 107 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई है। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ से अब तक 2,324 कच्चे-पक्के घरों, दुकानों को क्षति हुई, जबकि 1,932 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1,591 पालतु पशुओं की मौत हुई है। नुकसान का कुल आंकड़ा 1988 करोड़ रुपये पहुंच गया है।