शानन परियोजना के एसई अजीत कुमार ने बताया कि बरोट स्थित परियोजना की रेजरवायर में पानी की गिरावट के चलते विद्युत उत्पादन में गिरावट आई है, लेकिन तय लक्ष्य पूरा किया जा रहा है। वहीं, आरई बस्सी परियोजना के आरई मनोज सेन का कहना है कि ग्लेशियर जमने से बरोट स्थित रेजर वायर में पानी में गिरावट आई है। जिस कारण विद्युत उत्पादन कम हो रहा है। बुधवार को राजधानी शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में धूप खिलने के बावजूद अधिकतम तापमान 27 डिग्री तक ही पहुंचा।
प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम पारा गिरने से शीतलहर बढ़ गई है। लाहाैल की सिस्सू झील पर बर्फ की परत जम गई है। 13,124 फीट की ऊंचाई पर स्थित नीलकंठ झील के साथ रोहतांग दर्रे के साथ सटी भृगु झील का पानी भी ठोस बर्फ में तबदील होना शुरू हो गया है। 13,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित चंद्रताल झील के साथ मनाली-लेह सड़क से सटे सूरजताल, दीपकताल व अल्यास झील का पानी बीते कुछ दिनों से ही जमना शुरू हो चुका है। जनजातीय क्षेत्र पांगी के तहत सचे जोत की सड़क में फिसलन बढ़ गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 23 नवंबर को लाहौल-स्पीति, चंबा, कांगड़ा और कुल्लू जिले के ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश-बर्फबारी की संभावना है। बिलासपुर और सुंदरनगर में 23 व 24 नवंबर को कोहरा पड़ने का येलो अलर्ट जारी हुआ है। बुधवार सुबह सुंदरनगर और मंडी में कोहरे से दृश्यता 500 मीटर तक रही।