10 नवंबर, 2021 को ट्रायल कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 (1)(ए)(आई) के आदेश के मद्देनजर उक्त मामले की कार्यवाही रोक दी थी और आरोपियों को सभी कथित अपराधों से आरोप मुक्त कर दिया था। मामला 16 अप्रैल, 2019 को सदर थाना क्षेत्र का है। पुलिस टीम कांग्रेस भवन के पास कार्ट रोड पर ड्यूटी पर थी। आरोप लगे थे कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं यशवंत छाजटा, आकाश सैनी, अरुण शर्मा, हरि कृष्ण हिमराल, दिनेश चोपड़ा, इंद्रजीत सिंह, अमित कोहली, जैनब चंदेल, गीता नेगी समेत 80-90 अन्य लोगों ने एक राजनीतिक रैली में भाजपा नेता सतपाल सत्ती के खिलाफ नारे लगाए और उनके पुतले को आग लगा दी।
इसके बाद आईपीसी की धारा 143, 188 और 336 के तहत आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसी दौरान ट्रायल कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता में अपेक्षित अनुमति और उचित शिकायत के अभाव में अपराधों का संज्ञान लेने से इन्कार कर आरोपियों को बरी किया था। उधर, अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने कार्यवाही को रोकने के लिए सीआरपीसी की धारा 258 के प्रावधानों को लागू करने और शिमला के जिला मजिस्ट्रेट की ओर से लिखित शिकायत न मिलने के आधार पर आरोपियों को आईपीसी की धारा 143 और 336 के तहत अपराधों से मुक्त करने में एक महत्वपूर्ण अनियमितता और स्पष्ट त्रुटि की है।