आंकड़ों के अनुसार 2016 से 2019 के बीच कुल्लू में करीब 4.49 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2021 से 2024 तक यह संख्या मात्र 26,000 रह गई। इस गिरावट ने कुल्लू-मनाली, मणिकर्ण, कसोल, तीर्थन और बंजार घाटी के पर्यटन कारोबार को गहरा नुकसान पहुंचाया है। पर्यटन कारोबारी गजेंद्र ठाकुर, राजेंद्र प्रकाश और विजय सूद ने बताया कि कुल्लू, कसोल और मनाली में बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी आते थे, लेकिन 2020 के बाद इसमें भारी गिरावट आई है।
उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यटक भारतीय पर्यटकों की तुलना में अधिक दिनों तक रुकते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को अधिक लाभ होता था। अब पर्यटन उद्योग को इस संकट से उबारने के लिए नई रणनीति अपनाने की जरूरत है।
वर्ष 2019 से 2021 तक कोरोना के चलते विदेशी पर्यटकों की आमद असर पड़ा है। इसके बाद रूस-यूक्रेन और इस्राइल-हमास युद्ध से विदेशी पर्यटकों में भारी कमी आई है। विदेशी सैलानियों का असर कुल्लू के साथ-साथ हिमाचल और पूरे देश में पड़ा है- सुनयना शर्मा, जिला पर्यटन अधिकारी, कुल्लू