इनमें सबसे लंबी सुरंग करीब 27 किलोमीटर की होने का अनुमान है। हालांकि, परियोजना अभी प्रारंभिक चरण में है और अंतिम सर्वेक्षण तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद सुरंगों की संख्या, लंबाई और अन्य तकनीकी पहलुओं में बदलाव संभव है। परियोजना के साकार होने से हिमाचल के दुर्गम लाहौल क्षेत्र से होते हुए लेह तक रेल संपर्क स्थापित होने की उम्मीद है। इसके अलावा चंडीगढ़ से लेह तक यात्रा का समय भी काफी कम हो सकता है। रणनीतिक दृष्टि से यह रेललाइन महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना, सैन्य उपकरण और आवश्यक सामग्री की आवाजाही तेज और सुगम हो सकेगी। परियोजना के पूरा होने से लाहौल और लेह को रेल नेटवर्क से जोड़ने के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और देश की सामरिक तैयारियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। संवाद
जिस्पा में पेड़ों और सैपलिंग की गिनती शुरू
बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन की प्रारंभिक प्रक्रिया के तहत लाहौल के जिस्पा क्षेत्र में पेड़ों की मार्किंग और सैपलिंग (छोटे पौधे। की गिनती का शुरू कर दिया गया है। यह कार्य प्रस्तावित रेल परियोजना की प्रारंभिक प्रक्रिया का हिस्सा है। -इंद्रजीत सीरा, वनमंडलाधिकारी लाहौल।