हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बुधवार को विधानसभा में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 पारित हुआ। भाजपा विधायक दल के विरोध के बीच संशोधन विधेयक सदन में ध्वनिमत से पारित हुआ। मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधेयक सदन के पटल पर रखा था। संशोधन विधेयक लागू होने के बाद छह विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की सीधी भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एचपीपीएससी) के माध्यम से होगी। वहीं, गैर-शिक्षण पदों पर सीधी भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) या सरकार की ओर से अधिसूचित किसी अन्य भर्ती एजेंसी के जरिये की जाएगी।
भर्ती प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्धारित मापदंडों के अनुसार होगी। विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों में पारदर्शिता आएगी। इसके तहत विश्वविद्यालय प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति ही कर पाएंगे। अन्य सभी नियुक्तियां लोक सेवा आयोग और चयन आयोग के जरिये होंगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इससे विश्वविद्यालयों की सरकारी नौकरियों की भर्तियों में पारदर्शिता आएगी, कोई धांधली नहीं की जा सकेगी, जैसा कि पूर्व सरकार के समय हुई भर्तियों में हुआ है। विश्वविद्यालयों के वित्तीय खर्च में भी अब पारदर्शिता आएगी। संशोधन विधेयक में प्रावधान किया गया है कि विश्वविद्यालयों की वित्त समिति की अध्यक्षता प्रदेश सरकार के वित्त सचिव करेंगे।