खेतों में खड़ी फसल और जंगलों के बीच बढ़ती हाथियों की आवाजाही नई चुनौती बनती जा रही है। उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से निकलकर पांवटा साहिब से नाहन तक पहुंच रहे जंगली हाथियों को सुरक्षित प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश का पहला एलिफेंट कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। हाथियों की लगातार बढ़ रही गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य स्तर पर इसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा। सिरमौर में हाथियों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से यमुना नदी का जलस्तर कम होने के दौरान उत्तराखंड की तरफ से हाथी सिरमौर की सीमा में प्रवेश करते रहे हैं। पहले हाथियों की आवाजाही मुख्य रूप से बातामंडी, बहराल और सतीवाला तक सीमित रहती थी, जहां वे गन्ने और धान की फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद लौट जाते थे। अब हाथियों की आवाजाही पांवटा साहिब से लेकर नाहन सीमा तक देखी जा रही है।