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हिमाचल: पानी की हर बूंद की रखवाली, गांव निभाएंगे जिम्मेदारी, सभी जिलों में अभियान तेज करने के निर्देश

Tue, 21 Jul 2026 09:34 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव एवं राज्य नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक जैन की अध्यक्षता में मंगलवार को जल संचय जन भागीदारी कैच द रेन-2026 अभियान की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में सभी जिलों के उपायुक्त, जल शक्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया।
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जल संरक्षण के लिए चलेगा अभियान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल में जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में पंचायतों, शहरी निकायों, महिला मंडलों, युवा क्लबों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। साथ ही बावड़ियों, कूहलों और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण तथा गांव स्तर पर छोटे-छोटे वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव एवं राज्य नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक जैन की अध्यक्षता में मंगलवार को जल संचय जन भागीदारी कैच द रेन-2026 अभियान की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में सभी जिलों के उपायुक्त, जल शक्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया।

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बैठक में चार जुलाई से चार अगस्त तक चल रहे विशेष अभियान की जिला वार प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें जल संरक्षण कार्यों, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ समन्वय तथा किए गए कार्यों की जियो टैगिंग और पोर्टल पर अपलोड की स्थिति पर चर्चा हुई। साथ ही जल शक्ति मंत्रालय द्वारा तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने पर भी जोर दिया गया। प्रधान सचिव (जल शक्ति) अभिषेक जैन ने निर्देश दिए कि जल संरक्षण अभियान में पंचायतों, शहरी निकायों, शिक्षण संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों, युवा क्लबों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि यह अभियान वास्तव में जन भागीदारी का स्वरूप ले सके।
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उन्होंने कहा कि वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज के लिए गांव स्तर पर स्थानीय जरूरत के अनुसार छोटे-छोटे कार्य कराए जाएं और सभी कार्यों की जियो टैगिंग कर समय पर पोर्टल पर अपलोड किया जाए। बैठक में पारंपरिक जल स्रोतों जैसे बावड़ियों, खतरियों, कूहलों और पोखरों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही तय किया गया कि जल शक्ति विभाग अन्य विभागों को जल संरक्षण कार्यों के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराएगा। उपायुक्तों को अभियान की नियमित निगरानी कर निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य पूरे करने के निर्देश दिए गए।
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