हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने ग्राहक को मकान का देरी से कब्जा देने पर बिल्डर पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। शिकायतकर्ता ने रेरा में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि बिल्डर ने तय समयसीमा में आवंटित यूनिट का कब्जा नहीं दिया और समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया। सुनवाई के बाद प्राधिकरण ने शिकायत को सही मानते हुए बिल्डर को आदेश दिया है कि वह तत्काल प्रभाव से यूनिट का कब्जा उपलब्ध करवाए।
रेरा को उपलब्ध करवाए गए दस्तावेजों से साबित हुआ कि शिकायतकर्ताओं ने यूनिट की कुल कीमत 44 लाख पहले ही चुका दी थी, जिसमें 21 लाख चेक के माध्यम से और 23.16 लाख किराया के समायोजन के रूप में चुकाए गए। अलॉटमेंट लेटर और फार्म 26 ने भी भुगतान की पुष्टि की। इसके बावजूद बिल्डर ने अधूरा निर्माण बताते हुए कब्जा नहीं दिया। सुनवाई के दौरान बिल्डर न तो प्राधिकरण के सामने उपस्थित हुआ, न ही कोई दस्तावेज जमा किए। बार-बार अवसर देने के बावजूद बिल्डर ने न जवाब दिया और न ही अपने दावों को साबित किया। प्राधिकरण ने इसे जानबूझकर किया गया उल्लंघन माना।