हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भले ही अधिक शारीरिक गतिविधि के कारण लोग स्वस्थ माने जाते हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात है कि राज्य में 39 फीसदी लोग मोटापे से ग्रस्त हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 28.6 फीसदी है। वहीं, मोटे लोगों में भी हिमाचल के 55 फीसदी लोगों में पेट का मोटापा देखा गया है, जो राष्ट्रीय औसत 39.5 फीसदी से अधिक है। हिमाचल पेट के मोटापे के मामले में देश का चौथा सबसे खराब प्रभावित राज्य है। वहीं, हिमाचल में 11.5 फीसदी लोग मधुमेह से पीड़ित हैं, जबकि 18 फीसदी लोग प्री-डायबिटिक हैं। इसका अर्थ है कि अगले 10 वर्षों में उनमें मधुमेह विकसित होने की 50 फीसदी की संभावना है।
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अध्ययन में यह भी पाया गया कि हिमाचल के 61 फीसदी शारीरिक रूप से निष्क्रिय और 5 फीसदी ही अत्यधिक सक्रिय हैं। देश की वयस्क आबादी के 43 फीसदी से अधिक लोग इस श्रेणी में आते हैं। यह स्थिति न केवल टाइप-दो में डायबिटीज और गुर्दे की गंभीर बीमारी जैसे गंभीर रोगों के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी है, बल्कि इसे केवल विशेष स्क्रीनिंग टेस्ट के माध्यम से ही पहचाना जा सकता है। इन व्यक्तियों में मोटापे के आसानी से पहचानने योग्य बाहरी लक्षण नहीं दिखते हैं। यह अध्ययन देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के 1,13,043 लोगों पर सर्वे किया गया है।