खासकर पंचायत के जरिए सबसे अधिक प्रस्ताव आ रहे हैं। लेकिन इन पर अमल नहीं होने से पंचायत प्रतिनिधियों के साथ आम लोगों में भारी रोष है। बजट नहीं होने से सड़क, बिजली, पेयजल, सिंचाई, सड़क, रास्ते, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई मूलभूत सुविधाओं के लिए बजट मिलता है। यह बजट उपायुक्त द्वारा लोगों को आवंटित किया जाता है।
कांग्रेस सरकार हजारों करोड़ रुपये का ऋण ले रही है। फिर भी डीसी कार्यालय में आने वाला बजट नहीं दिया जा रहा है। इस वजह से प्रदेश की पंचायत में होने वाले विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। ग्रामीण स्तर पर रास्ते, सड़कें, पानी, बिजली सहित अन्य छोटे-छोटे काम नहीं हो हे हैं। अभी तक पंचायत के काम मनरेगा के तहत हो रहे थे। प्रदेश सरकार इसका भी शेयर जमा नहीं कर पा रही है और लोगों को परेशानी हो रही है। - गोविंद सिंह ठाकुर,पूर्व मंत्री एवं उपाध्यक्ष प्रदेश भाजपा।