इस पत्र के अनुसार 9 अक्तूबर 1990 के तय मानदंडों को बदला गया है। 1990 के बाद से प्रदेश के सामान्य क्षेत्रों में किसी भी गाड़ी के टायर को 18 हजार किलोमीटर चलने के बाद बदला जाता रहा है, जबकि जनजातीय क्षेत्रों के लिए यह सीमा 15 हजार किलोमीटर की रही है। इस अवधि से पहले टायरों पर रबड़ चढ़ाने या पूरी तरह से रिपेयर करने के बाद इन्हें सामान्य क्षेत्रों के लिए 25 हजार किमी और जनजातीय क्षेत्रों में 20 हजार किमी के बाद बदलने का प्रावधान रहा है। नई व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग वजन की गाड़ियों के लिए यह माइलेज अलग-अलग रहेगी। इसके लिए अब सामान्य और ई-गाड़ियों की दो अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं।
सामान्य गाड़ियों में 1,500 किग्रा वजन तक की गाड़ियों के टायर 24 हजार किमी के बाद बदले जाएंगे। 1,500 से 1,800 किग्रा वजन वर्ग पर 26 हजार, 1,800 से 2,500 किलो होने पर 28 हजार और 2,500 किग्रा से अधिक वजन पर 32 हजार किमी की माइलेज के बाद बदलेंगे। ई-वाहनों की श्रेणियों में 1,800 किलोग्राम तक की गाड़ियों में 20,500 किलोमीटर, 1,800 से 2,500 किलोग्राम में 24 हजार और 2,500 किलोग्राम में 27,500 किलोमीटर के बाद ही नए टायर लगाए जा सकेंगे।