सुबह सात बजे घर से निकलती थी और शाम को 7 बजे आना होता था
करिश्मा बताती हैं कि कॉलेज में पढ़ाई के दौरान पहले वह घर से सुबह 7 बजे निकल आती थी और शाम को सात बजे घर पहुंची थी। फिर मंडी में ही हॉस्टल में प्रवेश लेकर पढ़ाई करने ठानी।
मां बोलीं... बेटी ने मिटा दी उम्रभर की थकान
करिश्मा के चयन पर माता द्रुमति देवी ने कहा कि जब से खबर सुनी है खुशी से आंखों में आंसू भी आ रहे हैं। बेटी ने बुढ़ापे में उम्रभर की सारी थकान मिटा दी है। पति के देहांत के बाद चार बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई और परवरिश मुश्किल थी, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। दूध बेचकर और मनरेगा में काम करके बच्चों को पढ़ाया। आज बेटी की कामयाबी से उनका सिर गर्व से ऊंचा हो गया है।