हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शराब ठेकेदार को सरकार के छह करोड़ रुपये जमा करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सुशांत कपरेट ने अदालत को बताया कि शराब नीति में ठेकेदार को हर महीने एक तय राशि जमा करनी पड़ती है। ठेकेदार ने शराब का ठेका मिलने के बाद यह धनराशि जमा नहीं की। इसी पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।
यह मामला वर्ष 2023 का है। राज्य सरकार ने ठेकेदार को खुली नीलामी में शराब की दो इकाइयां आवंटित कीं। इसके बाद ठेकेदार ने पॉलिसी के तहत हर महीने पैसा जमा नहीं किया। राज्य सरकार ने ठेकेदार को पैसा जमा न करने पर नोटिस जारी किए। इसके बाद भू-राजस्व अधिनियम में संपत्ति की रिकवरी की कार्रवाई शुरू की गई। इसी के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि डिप्टी कमिश्नर आबकारी राजस्व जिला नूरपुर को एक पत्र लिखा था, जिसमें बकाया राशि की जानकारी मांगी गई थी, उसमें दी गई गणना मेल नहीं खाती है। अदालत ने याचिकाकर्ता को पहले यह पैसा जमा करने के निर्देश दिए हैं। अदालत इसके बाद ही इस मामले की सुनवाई करेगी।