इसके लिए चयनित कंपनियों के माध्यम से लैपटॉप और टैबलेट उपलब्ध करवाने की व्यवस्था बनाई गई थी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण कंपनियों ने अब पुरानी दरों पर उपकरण देने में असमर्थता जता दी है। इसके चलते पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। मार्च 2026 में सरकार ने मेधावी विद्यार्थियों के लिए 16 हजार रुपये के ई-वाउचर जारी किए थे और विद्यार्थियों ने उपकरणों की बुकिंग भी करवा दी थी। हालांकि, दो महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद अधिकांश विद्यार्थियों को लैपटॉप और टैबलेट नहीं मिल पाए। इस बीच रिडीम कार्ड भी निष्क्रिय हो गए, जिससे विद्यार्थी वाउचर राशि का उपयोग नहीं कर सके। स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) मॉडल अपनाने का प्रस्ताव तैयार किया है।
विभाग ने सभी जिलों से पात्र विद्यार्थियों का विस्तृत ब्योरा मांगा है और आरटीजीएस के माध्यम से राशि भेजने की संभावनाएं तलाश रहा है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो विद्यार्थी अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार डिजिटल उपकरण खरीद सकेंगे। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि मेधावियों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए सभी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही इस बाबत अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे लैपटॉप और टैबलेट के दाम बढ़ गए हैं। इसलिए चयनित कंपनियों ने महंगे उपकरणों और बढ़ी हुई रैम-स्टोरेज लागत का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस सरकार के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर दिसंबर 2025 में मंडी से योजना की शुरुआत हुई थी।