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हिमाचल: पंचायत के प्रमाणपत्र भवन की सुरक्षा की गारंटी नहीं, हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार

Sun, 21 Jun 2026 10:19 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

 हाईकोर्ट ने भूकंप के प्रति संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। 
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भूकंप के प्रति संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि पंचायतों की ओर से जारी प्रमाणपत्र किसी भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की गारंटी नहीं हो सकते। ऐसे में बड़े निर्माण कार्यों को मंजूरी से पहले मिट्टी की जांच और स्ट्रक्चरल डिजाइन असेसमेंट रिपोर्ट जरूर सुनिश्चित की जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ अनियोजित शहरी विकास व अंधाधुंध निर्माण से जुड़े एक जनहित मामले में पूर्व आदेशों की अनुपालन की समीक्षा कर रही थी।

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ऊंची इमारतों को पंचायत प्रमाणपत्रों के आधार पर विनियमित नहीं कर सकते

खंडपीठ ने कहा कि खड़ी पहाड़ियों और भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित ऊंची इमारतों को पंचायत प्रमाणपत्रों के आधार पर विनियमित नहीं कर सकते। पीठ ने कहा कि नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम, 1977 की धारा 31-ए के तहत भवनों के उपयोग से पहले मिट्टी की जांच रिपोर्ट, स्ट्रक्चरल डिजाइन रिपोर्ट और संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणपत्र जरूरी हैं। कोर्ट ने सरकार को इन प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान टीसीपी सचिव अमरजीत सिंह और निदेशक टीसीपी हेमिस नेगी अदालत में उपस्थित हुए। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी।
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सरकार की स्टेटस रिपोर्ट पर जताया असंतोष

सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए कोर्ट ने पाया कि लाहौल-स्पीति क्षेत्रीय योजना ही अधिसूचित हो सकी है। सोलन क्षेत्रीय योजना प्रारंभिक मसौदे के चरण में है, जबकि शिमला, कांगड़ा और कुल्लू की क्षेत्रीय योजनाएं समय-सीमा बढ़ाने के बावजूद लंबित हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकार ने इस दिशा में कोई विशेष प्रगति नहीं की और ऐसा प्रतीत होता है कि वह 11 मई 2026 के न्यायिक आदेश के बाद ही सक्रिय हुई है।
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