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Himachal Chitta: चिट्टे के जाल में फंसे युवक की कहानी, उसी की जुबानी; बोला- मैं नशा छोड़ना चाहता था लेकिन...

Tue, 25 Feb 2025 08:36 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी

सार

हिमाचल प्रदेश का एक ऐसा युवक जो नए दोस्तों संग चिट्टे के जाल में फंस गया और वो कैसे इस दलदल से बाहर निकला उसने पूरी कहानी बयां की। 
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नशा छोड़ चुके युवक ने सुनाई दास्तां। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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बल्ह घाटी का एक युवक नए दोस्तों संग चिट्टे के मकड़जाल में इस कद्र फंसा कि उसे बाहर निकलना मुश्किल हो गया, लेकिन पिता के कठोर कदम ने उसे इस दलदल से बाहर निकाल दिया। अब बेटा आम जिंदगी जी रहा है और कारोबार संभाला हुआ है। उसकी यह कहानी नशे में फंसे युवाओं के लिए प्रेरणा है।

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खास बातचीत में युवक ने बताया कि पढ़ाई-लिखाई में अच्छा होने के चलते पिता ने उसे रत्ती के एक अच्छे स्कूल में शिफ्ट कर दिया। पिता ट्रैक्टर चलाते थे। उनका सपना था कि बेटा इंजीनियर बने। 12वीं में नया स्कूल और नए दोस्त मिले तो चिट्टे के मकड़जाल में फंस गया। पिता से पैसे ऐंठकर उनसे मस्ती कर रात को बताया कि इन दिनों स्कूल में अतिरिक्त कक्षाएं लग रही हैं। साल बाद जब फेल हुआ तो सभी को दुख हुआ। पिता ने फिर दिलासा दिलाया कि बेटा और मेहनत कर आगे जाएगा। लेकिन बेटे की एक अलग दुनिया बन चुकी थी।

युवक ने बताया कि मुझे खुद पर यकीन था कि मैं बहुत ही मजबूत हूं, लेकिन अब मैं नशे को छोड़ना चाहता था। लेकिन नशा मुझे नहीं छोड़ रहा था। जब माता-पिता को पता चला तो घर में तूफान आ गया। पूरे समाज को पता था लेकिन मेरे घर वालों को पता नहीं था। पिता इज्जतदार आदमी हैं, लेकिन मेरी हरकतों से वह टूट चुके थे। मैं नहीं चाहता था कि कोई और इस दलदल में फंसे, लेकिन खुद के लिए रोज कुछ न कुछ चाहिए होता था। जीवन में वह सब किया जो नहीं करना चाहिए थे।

'पिता ने नशा मुक्ति केंद्र भेजा'
पिता ने एक दिन कठोर कदम उठाया और नशा मुक्ति केंद्र भेज दिया। मैं इसके विरोध में था, लेकिन इस दलदल से बाहर आना चाहता था। नशा मुक्ति केंद्र में छह महीने रहा। पता चला कि यह एक मानसिक बीमारी है। इसका इलाज जरूरी है। वहां पर मेरी सोच में बदलाव आया। दवाई खाने के बाद क्या करना चाहिए, समाज को कैसे डील करना है। यह सब वहां से सीखा। आज डेढ़ साल हो गया है। मैं इन सब चीजों से बाहर निकल आया हूं। इसके बाद आज तक नशे को हाथ नहीं लगाया है।
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मारने-पीटने से कुछ नहीं होगा, इलाज करवाना होगा
युवक ने बताया कि चिट्टे की लत में फंसे युवाओं को मारने-पीटने से कुछ नहीं होगा। मुर्गा बनाकर जलील करने से इनका स्तर और गिर जाएगा। यह सब मानसिक रोगी हैं। इन्हें मानसिक इलाज चाहिए।
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