युवक ने बताया कि मुझे खुद पर यकीन था कि मैं बहुत ही मजबूत हूं, लेकिन अब मैं नशे को छोड़ना चाहता था। लेकिन नशा मुझे नहीं छोड़ रहा था। जब माता-पिता को पता चला तो घर में तूफान आ गया। पूरे समाज को पता था लेकिन मेरे घर वालों को पता नहीं था। पिता इज्जतदार आदमी हैं, लेकिन मेरी हरकतों से वह टूट चुके थे। मैं नहीं चाहता था कि कोई और इस दलदल में फंसे, लेकिन खुद के लिए रोज कुछ न कुछ चाहिए होता था। जीवन में वह सब किया जो नहीं करना चाहिए थे।
'पिता ने नशा मुक्ति केंद्र भेजा'
पिता ने एक दिन कठोर कदम उठाया और नशा मुक्ति केंद्र भेज दिया। मैं इसके विरोध में था, लेकिन इस दलदल से बाहर आना चाहता था। नशा मुक्ति केंद्र में छह महीने रहा। पता चला कि यह एक मानसिक बीमारी है। इसका इलाज जरूरी है। वहां पर मेरी सोच में बदलाव आया। दवाई खाने के बाद क्या करना चाहिए, समाज को कैसे डील करना है। यह सब वहां से सीखा। आज डेढ़ साल हो गया है। मैं इन सब चीजों से बाहर निकल आया हूं। इसके बाद आज तक नशे को हाथ नहीं लगाया है।
मारने-पीटने से कुछ नहीं होगा, इलाज करवाना होगा
युवक ने बताया कि चिट्टे की लत में फंसे युवाओं को मारने-पीटने से कुछ नहीं होगा। मुर्गा बनाकर जलील करने से इनका स्तर और गिर जाएगा। यह सब मानसिक रोगी हैं। इन्हें मानसिक इलाज चाहिए।