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Ratan Tata Passes Away: रतन टाटा के आदेश पर एचआरटीसी की टीम से पहले हिमाचल पहुंच गए थे बसों के स्पेयर पार्ट

Fri, 11 Oct 2024 04:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।

सार

भारत के जाने-माने बिजनेसमैन और टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का बुधवार देर शाम निधन हो गया। 86 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनका ऐसा ही एक किस्सा हिमाचल पथ परिवहन निगम के साथ भी जुड़ा है। बात साल 1997 की है। 
 
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डिजाइन फोटो। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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रतन टाटा देश के महान उद्योगपति इसलिए बने, क्योंकि वह अपने उपभोक्ता की हर बात का विशेष ध्यान रखते थे। उनका ऐसा ही एक किस्सा हिमाचल पथ परिवहन निगम के साथ भी जुड़ा है। बात साल 1997 की है। उस समय हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम ने टाटा की बसों की खरीद बंद कर दी थी। निगम की ओर से दूसरी कंपनियों की बसें खरीदी जा रही थीं। निगम का तर्क था कि टाटा की बसों के स्पेयर पार्ट उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसी बीच निगम की एक टीम बसों की खरीद के सिलसिले में मुंबई गई। वहां टाटा के अधिकारियों को भी टीम के पहुंचने का पता चला।

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उन्होंने निगम के पदाधिकारियों और अधिकारियों की रतन टाटा के साथ बैठक तय कर दी। टाटा कार्यालय नरीमन हाउस में हुई बैठक में एचआरटीसी के तत्कालीन उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक बाबूराम गौतम भी मौजूद थे। बाबूराम गौतम ने बताया कि इतने बड़े उद्योगपति होने के बावजूद रतन टाटा बिल्कुल सादगी से मिले और दोपहर का भोजन कराया। उन्होंने एचआरटीसी की ओर से उनकी बसों की खरीद बंद करने के बारे में पूछा तो बताया कि स्पेयर पार्ट उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। रतन टाटा ने जो स्पेयर पार्ट चाहिए थे, उनकी लिस्ट मांगी। इत्तेफाक से निगम की टीम पार्ट की लिस्ट साथ लेकर गई थी। रतन टाटा ने पूछा कि स्पेयर पार्ट एचआरटीसी को कहां चाहिए। इस पर उन्हें चंडीगढ़ पहुंचाने का सुझाव दिया।

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रतन टाटा ने कहा कि चार जगहों के नाम बताएं, वहां स्पेयरपार्ट पहुंचा दिए जाएंगे। निगम ने जसूर, मंडी, धर्मशाला और चंडीगढ़ के नाम बताए। उसी समय रतन टाटा ने बैठक में मौजूद अपने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह स्पेयर पार्ट निगम की टीम से पहले उन जगहों पर पहुंच जाने चाहिए। बाबू राम गौतम ने बताया कि हुआ भी ऐसा ही। उनके प्रदेश में पहुंचने से पहले स्पेयर पार्ट पहुंच गए थे। उन्होंने बताया कि उस बैठक में रतन टाटा को स्पेयर पार्ट का उत्पादन बढ़ाने का भी सुझाव भी दिया था, जिस पर उन्होंने अमल भी किया।

पूर्व विधायक संघ के प्रदेशाध्यक्ष बाबू राम ने बताया कि रतन टाटा सच्चे समाजसेवी भी थे। कोरोना के समय उन्होंने सरकार को 2,000 करोड़ रुपये दान दिए। रतन टाटा का देश के लिए अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मरणोपरांत उन्हें भारत रत्न दिया जाए।
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