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Himachal News : बागवानों से सेब 12 रुपये में खरीद कर दो रुपये किलो में बेच रहा एचपीएमसी, जानें

Tue, 02 Sep 2025 01:17 AM IST
अंकेश डोगरा भारती शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

एमआईएस के तहत बागवानों से 12 रुपये प्रतिकिलो में खरीदे गए सी ग्रेड सेब को परवाणू में डेढ़ से दो रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बेचा जा रहा है। 
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डिजाइन फोटो। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) इस बार सेब की प्रोसेसिंग के साथ ऑक्शन भी कर रहा है। मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत बागवानों से 12 रुपये प्रतिकिलो में खरीदे गए सी ग्रेड सेब को परवाणू में डेढ़ से दो रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बेचा जा रहा है।

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सी ग्रेड सेब मार्केट में आने के बाद ए ग्रेड के दामों में गिरावट आ गई है। इससे बागवानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। परवाणू में यह सेब 55 से 110 रुपये प्रति बोरी बिक रहा है। इसमें इसे डेढ़ से दो रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से दाम मिल रहे हैं। बागवानों से खरीदा गया सेब खरीद केंद्रों पर बोरियों में सड़ रहा है। यह सेब मार्केट में न आए इसके लिए सरकार में एचपीएमसी को ज्यादा से ज्यादा सेब को प्रोसेस करके उत्पाद बनाने के आदेश दिए थे। इसके लिए सरकार ने इस साल हिमफेड से हटाकर केवल एचपीएमसी को ही एमआईएस के तहत सेब खरीदने के आदेश दिए थे।

एचपीएमसी 2023 तक सेब की ऑक्शन करता था लेकिन करोड़ों के घाटे से बचने के लिए एचपीएमसी ने 2024 में ऑक्शन करना बंद कर दी थी। इस साल फसल ज्यादा होने के चलते एचपीएमसी ने ऑक्शन दोबारा शुरू कर दी है। इस साल एचपीएमसी ने सोनीपत की निजी कंपनी नेचुरल फ्रूट चेन को बोरी वाला सी ग्रेड सेब बेचने का करार किया था, जिसमें कंपनी ने एचपीएमसी से आठ रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से सेब खरीदना था।

एचपीएमसी ने 31 अगस्त तक 28 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद कर ली है। जिसमें आठ हजार मीट्रिक टन सेब की प्रोसेसिंग और 10 हजार मीट्रिक टन सेब की ऑक्शन कर ली है। जबकि 10 हजार मीट्रिक टन सेब खरीद केंद्रों पर पड़ा है, जो सड़ने की कगार पर है।

2023 में सेब ऑक्शन से एचपीएमसी दो करोड़ का हुआ था घाटा
2023 में एचपीएमसी ने बागवानों से एमआईएस के तहत तीन करोड़ साठ लाख रुपये का सेब बेचा था। इसमें एचपीएमसी को दो करोड़ 25 लाख रुपये का घाटा हुआ था। करोड़ों के घाटे से बचने के लिए एचपीएमसी ने सेब की पूरी खेप का इस्तेमाल जूस, फ्रूट जैम और वाइन बनाने के लिए करने का फैसला लिया था।

कंपनी के साथ विवाद चल रहा है। एचपीएमसी ने कंपनी को 70 से 80 गाड़ियां सेब भेजा था। उससे बाद कंपनी रॉटेज की वसूली ज्यादा करने लग गई थी। इसके चलते ट्रांसपोर्टर ने उन्हें माल देना बंद कर दिया है। अभी कागजी कार्रवाई चल रही है। - अरिंदम चौधरी, प्रबंध निदेशक, एचपीएमसी
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ज्यादा सेब होने की वजह से इस बार एचपीएमसी सेब की ऑक्शन भी करेगा। इससे घाटा भी होगा। जिस निजी जूस बनाने वाली कंपनी के साथ करार हुआ है, वह नहीं खरीद रही है। - सी पालरासू, सचिव, बागवानी विभाग
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