अमर उजाला ने रिपोर्ट के दावे का सच जानने के लिए शिलोनबाग पंचायत के मुंडाघाट गांव का दौरा किया तो हिमाचल प्रदेश मानव विकास की संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के सहयोग से तैयार रिपोर्ट का वहां के हालात से दूर तक का नाता नहीं दिखा। मुंडाघाट के लोगों का कहना था कि यहां से कोई पलायन नहीं हुआ और न यहां पर पानी की कोई किल्लत रहती है। स्थानीय लोगों ने हिमाचल प्रदेश सरकार की इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया। यूएनडीपी इंडिया की प्रतिनिधि डॉ. एंजला लूसीगी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह रिपोर्ट 27 अक्तूबर को शिमला में जारी की थी।
असल में विश्वविख्यात पर्यटन स्थल कुफरी से आगे और पर्यटन स्थल चायल से पीछे बसा मुंडाघाट गांव हर लिहाज से समृद्ध है। गांव से होकर ही नहीं, बल्कि सड़क से नीचे तक बने घरों के लिए भी संपर्क मार्गों की सुविधा है। गांव में खेतीबाड़ी होती है, लोगों के सेब के बगीचे हैं। लोगों ने दुधारू पशु रखे हैं। गांव के लिए जलशक्ति विभाग ने पेयजल सप्लाई के लिए स्टोरेज टैंक तक बनाए हैं, जहां से हर दूसरे-तीसरे दिन लोगों के घर-घर पानी की सप्लाई होती है। सिंचाई सुविधा का भी लोगों ने आसपास की खड्डों से बंदोबस्त कर रखा है।
रिपोर्ट में बताया कि मुंडाघाट क्षेत्र में झरने सूखने से पिछले एक दशक में गांव की आबादी आधी हो गई है। पानी की कमी की वजह से परिवारों को यहां से पलायन करना पड़ा। अमर उजाला ने स्थानीय लोगों से जब इस रिपोर्ट का जिक्र किया तो लोग इसे जानकर हैरान थे। बुजुर्गों से लेकर युवाओं और महिलाओं तक से बात की तो किसी ने भी इस रिपोर्ट को सत्य नहीं बताया।
शिलोनबाग पंचायत का मुंडाघाट गांव खुशहाल है। यहां से आजतक ऐसी कोई नौबत नहीं आई कि लोगों को किसी भी समस्या के कारण पलायन करना पड़ा हो। लोगों की अपनी जमीनें हैं, मकान हैं। सरकार की रिपोर्ट सरासर गलत है।- तनु ठाकुर, पंचायत प्रधान, शिलोनबाग