नवंबर के सर्द मौसम में अगर आम के पेड़ पर फल नजर आएं तो हर कोई हैरान हो सकता है। ऐसा सच कर दिखाया है सरकाघाट उपमंडल के अप्पर लुणाधा गांव के सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार अमरनाथ ने।
उन्होंने अपने बगीचे में आम की ऐसी किस्में उगाई हैं जो साल में दो बार फल देती हैं। इन दिनों उनके बगीचे में लगे आम के पेड़ पर फल पकने को तैयार हैं। हर कोई उनके आमों को देखकर दंग रह जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आम की ऐसी प्रजातियां हिमाचल में बहुत कम हैं, परंतु उगाई जा सकती हैं।
लुणाधा निवासी अमरनाथ का कहना है कि उन्हें बागवानी का बचपन से शौक था। कांगड़ा जिले के देहरागोपीपुर से 25 साल पहले आम की एक कलम लाए थे। इस कलम को घर के आंगन में लगे आम के छोटे पौधे पर लगाया गया। धीरे-धीरे पेड़ बड़ा होने लगा और 20 साल के बाद फल देने लगा।
बकौल अमरनाथ पेड़ पर साल में दो बार आम की भरपूर फसल होती है। आम के इस पेड़ पर अप्रैल-मई में अन्य पेड़ों की तरह बौर निकलता हैं और जुलाई में पहली फसल पक जाती है।
पहली फसल समाप्त होने के बाद पेड़ पर फिर से बौर आना शुरू हो जाता है। सितंबर के अंतिम सप्ताह तक आम का साइज बढ़ने लगता है और 15 अक्तूबर के बाद पकने लगते हैं। अमरनाथ ने वर्ष में दो बार फल देने वाले इस आम के पेड़ से करीब 20-25 पौधों का बगीचा तैयार कर लिया है। यह दो-तीन साल में फल देने लगेंगे।
बागवानी विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ नरेदव ठाकुर का कहना है कि आम की इस तरह की किस्में हिमाचल में कम होती हैं। उन्होंने कहा कि लुणाधा गांव में साल में आम की दो बार फसल तैयार हो रही हैं। इससे किसानों की आर्थिकी और मजबूत होगी, उन्हें इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।