पहले दिन 11 सत्रों में 18 वक्ता शामिल हुए। लिटफेस्ट की शुरुआत में खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह और पत्रकार एवं स्तंभकार बच्ची करकरिया ने खुशवंत सिंह पर विचार रखे। तीन दिन तक 45 से ज्यादा नामचीन हस्तियां शिरकत करेंगी। आगामी दो दिनों में भी कई नामी लेखकों की किताबों पर बार चर्चा होगी। लिटफेस्ट के मुख्य वक्ताओं में मशहूर पर्यावरणविद सोनम वांगचुक, भारतीय सेना के पूर्व जनरल एमएम नरवणे, मेजर जनरल रंजन महाजन, पूर्व रॉ चीफ एएस दुलत भी शामिल हैं।
इसके अलावा फिल्मी दुनिया और कला जगत से इम्तियाज अली (फिल्म निर्देशक), दिव्या दत्ता (अभिनेत्री), संध्या मृदुल (अभिनेत्री) और पूजा बेदी, संगीत की दुनिया से सतिंदर सरताज (पंजाबी गायक), सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद डॉ. रवि चोपड़ा, लेखक, पत्रकार और विचारक जेरी पिंटो, नीलम मान सिंह चौधरी, संजय हजारिका, प्रोबल दासगुप्ता, कमला कपूर, सार्थक आहूजा, विष्णु सोम, फिरोज गुजराल और हरतोष सिंह बल शिरकत करेंगे। कार्यक्रम में फर्स्ट ग्लोबल की संस्थापक देविना मेहरा, शिक्षाविद, रंगमंच निर्देशक फैसल अल्काजी, बीबीसी की पूर्व पत्रकार गिलियन राइट, टीएमसी से पूर्व सांसद जवाहर सरकार उद्बोधन देंगे।
पहले दिन इन्होंने की चर्चा
फेस्टिवल की शुरुआत ख्वाबगाह से हुई, जिसमें साहित्यकारों और वक्ताओं ने असहमति जताने के अधिकार और समाज में बढ़ती ध्रुवीकरण की स्थिति पर अपने विचार रखे। साथ ही अधिवक्ता मीहिरा सूद ने लड़कियों के मौलिक अधिकारों से आगे के गंभीर सवालों तथा प्यार, धोखे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया जैसे विषयों पर चर्चा की। साथ ही साहित्यकार संजय हजारिका की किताब मिजोरम: द बैटल फील्ड टू बैलट बॉक्स पर चर्चा हुई। युवा समानांतर सत्र (फॉर एवर यंग) एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें 15 से 18 वर्ष की आयु के छात्रों और उभरते लेखकों की प्रतिभा को मंच देने के लिए विशेष समानांतर कार्यशालाएं और सत्र चलाए गए।
खुशवंत सिंह को 6 पैसे के पोस्टकार्ड पर आते थे पत्र, सभी का देते थे जवाब
कसौली में 15वें खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल में पहले दिन कई वक्ताओं ने अपनी विचार रखे। इस दौरान प्रख्यात लेखक खुशवंत सिंह के विचारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और समकालीन सामाजिक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। फेस्टिवल असहमति की कला और महिला अधिकारों पर केंद्रित रहा। उत्सव का उद्घाटन समारोह कसौली क्लब में गायक प्रीत सिंह की प्रस्तुति के साथ हुआ। सह-निदेशक राहुल सिंह ने खुशवंत सिंह के जीवन दर्शन को याद किया। राहुल सिंह ने असहमति की कला को मौजूदा समय में प्रासंगिक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि असहमति का अर्थ सड़क पर हिंसा नहीं, बल्कि तर्कों से अपनी बात मजबूती से रखना है। वरिष्ठ पत्रकार बाची करकारिया ने खुशवंत सिंह के साथ अपने संस्मरण साझा किए। उन्होंने उनकी प्रसिद्ध कृतियों जैसे ट्रेन टू पाकिस्तान और उनके बेबाक अंदाज का जिक्र किया। कहा कि 6 पैसे के पोस्ट कार्ड पर उन्हें लोग पत्र लिखते थे और वे जवाब भी देते थे। जब उन्हें कहा गया कि जिन्होंने आपको पत्र भेजे हैं वह भूल भी गए हाेंगे क्या लिखा था, मगर वह बोलते थे यह उनकी समस्या है।
महिला अधिकारों पर विशेष सत्र
फेस्टिवल में महिलाओं के मौलिक अधिकारों, स्वतंत्रता और समाज में उनकी स्थिति पर एक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित हुआ। इसका शीर्षक गर्ल्स जस्ट वाना हैव फंडामेंटल राइट्स रहा। प्रसिद्ध कानूनी विशेषज्ञ मिहिरा सूद और वरिष्ठ पत्रकार अन्ना एमएम वेटिकड ने इस चर्चा में हिस्सा लिया। इसमें चर्चा हुई कि देश में आज भी दुष्कर्म हो रहे हैं। हालांकि इसमें लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं, लेकिन पुलिस की जांच में आज भी लंबा समय लग रहा है, जिससे न्याय मिलने में काफी देरी हो जाती है। वक्ताओं ने जोर दिया कि आनंद, स्वतंत्रता और गरिमापूर्ण जीवन महिलाओं के बुनियादी और सांविधानिक अधिकार हैं। कहा कि पितृसत्तात्मक सोच और रूढ़िवादी सामाजिक नियम आज भी महिलाओं की आजादी में बाधा हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक दोधारी तलवार
फेस्टिवल के इस महत्वपूर्ण सत्र में आज के सबसे चर्चित और प्रभावशाली विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर गहन मंथन किया गया। सत्र का शीर्षक एआई: द डबल-एडज सवार्ड इस बात का सटीक प्रतीक है कि कैसे तकनीक का यह नया दौर मानवता के लिए एक साथ अपार संभावनाओं और गंभीर चुनौतियों दोनों को लेकर आया है। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर रोशनी डाली कि कैसे एआई ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, अनुसंधान, और उद्योगों की कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। हालांकि, एआई के नकारात्मक पहलुओं और जोखिमों पर भी गहरी चिंता जताई गई।
द गुरु एंड द गुरुद्वारा, आस्था, इतिहास और वास्तुकला का संगम
फेस्ट के एक अन्य सत्र में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर चर्चा हुई। इसमें द गुरु एंड द गुरुद्वारा में सिख गुरुओं के जीवन दर्शन और गुरुद्वारों के ऐतिहासिक व स्थापत्य महत्व पर गहन चर्चा की गई। प्रख्यात वक्ता रूपिंदर सिंह और कमला कपूर ने भाग लिया, जबकि इसका संचालन आराधिका शर्मा ने किया। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि गुरुद्वारा केवल एक धार्मिक प्रार्थना स्थल नहीं है, बल्कि यह समानता, सेवा (लंगर), और सामुदायिक जुड़ाव का एक जीवंत केंद्र है। सिख गुरुओं के उपदेशों और उनके जीवन मूल्यों को दर्शाते हुए वक्ताओं ने बताया कि कैसे गुरुद्वारे समाज के हर वर्ग को बिना किसी भेदभाव के अपने साथ जोड़ते हैं। इसके अलावा, गुरुद्वारों की वास्तुकला और उनके ऐतिहासिक स्वरूप के पीछे की गहरी आध्यात्मिक सोच पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
महाराजा रणजीत सिंह के जीवन पर चर्चा
एक ऐतिहासिक सत्र रणजीत सिंग्स लिडिंग लेडीज में पंजाब के महान शासक महाराजा रणजीत सिंह के जीवन, शासन और उनके इर्द-गिर्द प्रभाव डालने वाली प्रभावशाली महिलाओं के इतिहास पर एक चर्चा की गई। इस सत्र में प्रख्यात वक्ता रणजीत पवार, चेतना कीर, सकून सिंह और मिशका सिन्हा ने भाग लिया। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सिख साम्राज्य के उत्थान और उसके राजनीतिक ताने-बाने को आकार देने में शाही परिवार और दरबार की महिलाओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण थी। अक्सर इतिहास के पन्नों में पुरुष शासकों और युद्धों को ही मुख्य रूप से जगह मिलती है, लेकिन इस सत्र में उन रानियों, माताओं और महिलाओं के व्यक्तित्व व राजनीतिक सूझबूझ को सामने लाया गया, जिन्होंने परदे के पीछे से या प्रत्यक्ष रूप से साम्राज्य के फैसलों और उसकी संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया था।
यंग फॉरएवर पुस्तक का विमोचन
फेस्ट के दौरान यंग फॉरएवर पुस्तक के लॉन्च और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल डॉ. मनोज नरवणे शामिल रहे, जबकि इसका संचालन वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका बची करकारिया ने किया। सत्र के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कैसे सही जीवनशैली, मानसिक अनुशासन और शारीरिक सक्रियता अपनाकर न केवल उम्र के बढ़ते प्रभावों को थामा जा सकता है, बल्कि एक ऊर्जावान और स्वस्थ जीवन भी जिया जा सकता है।