याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने ये बताया
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि हिमाचल प्रदेश प्रिजनर्स मैनुअल, 2021 के अनुसार एक समय में हर छह कैदियों पर कम से कम एक गार्डिंग कर्मचारी होना चाहिए। 8 घंटे से अधिक ड्यूटी नहीं होनी चाहिए। कर्मचारियों को प्रत्येक सप्ताह 24 घंटे का अवकाश और कम से कम चार रातों का आराम भी मिलना चाहिए। धर्मशाला जेल का उदाहरण देते हुए बताया गया कि 355 कैदियों की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले यहां 503 से अधिक कैदी थे। जेल अधीक्षक ने मैनुअल के 1:6 अनुपात के आधार पर तीन शिफ्टों के लिए 237 वार्डरों समेत 261 कर्मचारियों की जरूरत बताई, जबकि केवल 56 वार्डर पद स्वीकृत थे। बाद की गणना में 196 वार्डर और 65 हेड वार्डरों की जरूरत बताई गई। आरटीआई के अनुसार कुछ दिनों में एक वार्डर से 10 घंटे तक ड्यूटी ली गई।
हिमाचल की जेलों में 2,580 की क्षमता, रखे हैं 3,355 बंदी
कुछ वार्डरों को सप्ताह में चार से पांच और महीने में 20 से 22 नाइट ड्यूटी करनी पड़ रही है। नाहन जेल में 83 स्वीकृत पुरुष वार्डर पदों में केवल 63 भरे थे, जबकि चार कर्मचारी अन्य स्थानों पर अटैच थे। रिकॉर्ड के अनुसार एक वार्डर की सप्ताह में पांच दिन-चार रात, महीने में 21 दिन व 20 रात की ड्यूटी दर्ज है। हिमाचल प्रदेश की 14 जेलों में कुल 2,580 कैदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में इनमें 3,355 कैदी बंद हैं। इनमें 1,113 सजायाफ्ता, 2,203 विचाराधीन व 39 निरोधात्मक बंदी शामिल हैं। विधानसभा में विधायक केवल सिंह पठानिया के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी सामने आई।