बता दें कि बीबीएन क्षेत्र की करीब 7,000 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की गई है। क्षेत्र के मैदानी इलाकों में तो सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन रामशहर, कुठाड़ और चंडी जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। इस वर्ष नवंबर तक खेतों में अच्छी नमी होने के कारण किसानों ने समय पर बिजाई कर दी थी और फसल उगनी भी शुरू हो गई थी, लेकिन पिछले एक माह से सूखा पड़ने के कारण अब फसल के किनारे मुरझाने लगे हैं।
सुबह ड्यूटी जाते समय और शाम को 6 बजे के बाद वापस लौटते वक्त कामगारों को घनी धुंध और ठिठुरन का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और कामगारों का कहना है कि लंबे समय से बारिश न होने के कारण सूखी ठंड जानलेवा साबित हो रही है, जिससे सांस लेने में दिक्कत और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। सूखी ठंड और प्रदूषण मिश्रित धुंध के कारण क्षेत्र में सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बद्दी अस्पताल के बीएमओ डॉ. अनिल अरोड़ा ने बताया कि अस्पताल में रोजाना 200 से 250 की ओपीडी हो रही है, जिसमें से करीब 40 से 50 मरीज केवल सर्दी, जुकाम और खांसी के पहुंच रहे हैं।
बारिश गेहूं की फसल के लिए यूरिया का काम करेगी। इससे न केवल गेहूं की रुकी हुई ग्रोथ शुरू होगी, बल्कि पैदावार में भी सुधार होगा। फिलहाल किसान टकटकी लगाकर आसमान की ओर देख रहे हैं। -डॉ. संदीप गौतम, विषयवाद विशेषज्ञ, कृषि विभाग