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Himachal News: आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने ईजाद की फोल्डेबल संरचना, भारतीय सेना के लिए बनेगा मजबूत हथियार

Sat, 31 May 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी

सार

आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने पुल के लिए एक नया स्थापित तरीका विकसित किया है। यह सेना के लिए मजबूत हथियार बन सकता है। जानें विस्तार से खबर में...
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आईआईटी मंडी की ओर से अंतरिक्ष लैंडर का मॉडल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने पुल के लिए एक नया स्थापित तरीका विकसित किया है। यह न केवल फोल्डेबल है, बल्कि वास्तविक दुनिया की लोडिंग परिस्थितियों में मजबूत भी है। यह सेना के लिए मजबूत हथियार बन सकता है। इसके जरिये विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों में तुरंत पुल समेत रास्ता बनाकर सेेना को आगे बढ़ाया जा सकता है।

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आईआईटी मंडी की यह खोज अब अंतरिक्ष की नई उन्नत तकनीकों में बदल रही है जोकि भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों को शक्ति प्रदान कर सकती है। धरती में सफलता के बाद अब टीम अंतरिक्ष में भी साॅफ्ट लैंडिंग के लिए शोध में जुटी है। डॉ. शुभमॉय सेन के मार्गदर्शन में आईआईटी मंडी की आई फोर एस प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं सुमित कुमार, अभिषेक भारद्वाज, शिवांश सूद ने यह उपलब्धि हासिल की है।

यह शोध द इंस्टीट्यूशन ऑफ स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स के शोध जर्नल, एल्सेवियर स्ट्रक्चर्स जर्नल में प्रकाशित हो चुका है। इस सफलता से प्रेरित होकर शोध दल ने ग्रहीय लैंडर की अवधारणा पर भी काम शुरू किया है। इसे टेंसेग्रिटी लैंडर कहा जाता है।

शोधकर्ताओं की टीम ने मौजूदा समय में टेलीस्कोपिक और गैर-टेलीस्कोपिक स्थापित करने की तकनीकें विकसित की हैं। इन तकनीकों ने बकलिंग, केबल उलझाव और स्ट्रट टकराव जैसी समस्याओं को हल किया है। इसे टेंसेग्रिटी संरचनाएं कहा जाता है। छड़ों और केबलों से बनी यह संरचनाएं कांपैक्ट, लचीली और झटकों को अवशोषित करने में बेहद कुशल हैं।

अंतरिक्ष यान के अंदर सपाट रूप से पैक करने के लिए डिजाइन किया गया है। टेंसेग्रिटी लैंडर लैंडिंग के समय खुद-ब-खुद खुल सकता है। इससे थ्रस्टर या एयरबैग जैसी जटिल और टूटने वाली प्रणालियों की जरूरत खत्म हो जाती है। शुरुआती सिमुलेशन से पता चला है कि यह पैराशूट, रेट्रो-रॉकेट या एयरबैग पर निर्भर किए बिना, पारंपरिक कठोर लैंडर की तुलना में संवेदनशील पेलोड पर समान या कम झटका लगने के साथ 15 मीटर तक गिरावट को सह सकता है।
 
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टीम का अब लैंडर बनाने पर फोकस
शोधकर्ताओं की मानें तो चंद्रयान-1 के प्रभाव जांच से लेकर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट-लैंडिंग तक भारत के हाल के प्रयासों को देखते हुए टेंसेग्रिटी लैंडर भविष्य में एक आकर्षक विकल्प हो सकता है। उधर, डॉ. शुभमॉय सेन ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा लैंडर बनाना है जो हल्का, लचीला और अनजान जगहों के लिए तैयार हो।
 
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