हाईकोर्ट ने पाया कि आरएंडपी नियमों में संशोधन के बाद भी चार अन्य केवल मैट्रिक पास व्यक्तियों को सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर के रूप में पदोन्नत किया गया और उन्हें कभी वापस नहीं किया गया। कोर्ट ने कानून के एक सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि कानून किसी व्यक्ति को वह करने के लिए मजबूर नहीं करता जो असंभव है। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिका की लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ता ने दिसंबर 2023 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से कला स्नातक की डिग्री प्राप्त कर ली थी।
याचिकाकर्ता ने हिमाचल प्रदेश राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में एक आवेदन दायर किया था, जो बाद में हाईकोर्ट में ट्रांसफर हो गया। उन्होंने सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर पद के लिए भर्ती और पदोन्नति नियमों (आरएंडपी नियम) में 14 फरवरी 2011 को हुए संशोधन को चुनौती दी थी। इस संशोधन में जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर से सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर के पद पर पदोन्नति के लिए बैचलर डिग्री को अनिवार्य योग्यता बना दिया गया था।