सरकार ने अदालत से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उक्त वीडियो को तत्काल हटाने का अनुरोध किया था, जिससे आवेदक के अनुच्छेद 19(1)(ए) और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन रोका जा सके। महाधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि चूंकि मूल रिट याचिका का निपटारा पहले ही हो चुका है, इसलिए न्यायालय इस मामले में और कार्रवाई करने के लिए अधिकृत नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि आवेदक को कोई शिकायत है तो वह अपनी शिकायतों के निवारण के लिए स्वतंत्र रूप से उचित और उपयुक्त आवेदन या याचिका दायर कर सकता है।
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