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हिमाचल हाईकोर्ट सख्त: नदियों और खड्डों के किनारे कचरा फेंकना हर हाल में रोकने के दिए निर्देश

Sat, 25 Jul 2026 06:50 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन की समीक्षा करते हुए विभिन्न जिलों के प्रशासन और स्थानीय निकायों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।  अदालत ने स्पष्ट किया कि नदियों और खड्डों के किनारे कचरे का निस्तारण पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। 
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अदालत(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन की समीक्षा करते हुए विभिन्न जिलों के प्रशासन और स्थानीय निकायों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि नदियों और खड्डों के किनारे कचरे का निस्तारण पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सुन्नी में सतलुज नदी के किनारे बने ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट को तत्काल अन्यत्र स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।

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अदालत ने कहा कि मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति में नदी प्रदूषित होने का खतरा बना रहता है। हमीरपुर में ब्यास नदी, कुणाह खड्ड, मैहरे, सलौणी, चंबा में रावी नदी और करियां फॉरेस्ट बैरियर के पास अवैध डंपिंग पर भी अदालत ने गंभीर चिंता जताई। खंडपीठ ने शिमला, चंबा, बिलासपुर, कांगड़ा और कुल्लू के उपायुक्तों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराते हुए अगली सुनवाई तक सुधारात्मक कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण स्थानीय निकायों और जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

डीएलएसए की रिपोर्ट के अनुसार नाहन-कुमारहट्टी और देहरादून-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग पर नालियां गंदगी से भरी पड़ी हैं। नाहन के वार्ड-7 में कचरा प्रबंधन व्यवस्था प्रभावित होने से बंदरों का आतंक बढ़ने की बात भी सामने आई है। इस मामले में हाईकोर्ट ने डीसी सिरमौर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रोहड़ू नगर परिषद में प्रतिदिन 2.98 मीट्रिक टन कचरा एकत्र किया जा रहा है और 19 टन प्लास्टिक अपशिष्ट का निस्तारण किया गया है। कोटखाई में शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कलेक्शन हो रहा है।

वहीं, रामपुर और जुब्बल के एमआरएफ प्लांटों में आग लगने से मशीनरी और कई टन सूखा कचरा नष्ट हो गया। नेरवा, चौपाल, चिड़गांव और जुब्बल में कचरा प्रबंधन परियोजनाओं के लिए एफसीए मंजूरियां लंबित हैं। अदालत को बताया गया कि केंदुवाल (बद्दी) में दिसंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच आए 21,856 टन कचरे में से 20,440 टन का प्रसंस्करण किया जा चुका है। बद्दी में पड़े 76,905 मीट्रिक टन पुराने कचरे को 31 दिसंबर 2027 तक पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए बायोगैस प्लांट और बड़े शेड का निर्माण भी किया जा रहा है।

लाहौल-स्पीति की पहल की सराहना
हाईकोर्ट ने लाहौल-स्पीति में कचरा प्रबंधन की प्रगति पर संतोष जताया। जिला प्रशासन ने दिसंबर 2026 तक 100 फीसदी स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण का लक्ष्य तय किया है। केलांग क्षेत्र में घर-घर से अलग-अलग सूखा और गीला कचरा संग्रहण प्रणाली शुरू हो चुकी है।
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कंडाघाट वेस्ट प्लांट मामले में त्वरित सुनवाई के निर्देश
सोलन के कंडाघाट स्थित तंदाल में प्रस्तावित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट से जुड़े मामले में वर्ष 2024 से लगी रोक के चलते काम अटका हुआ है। हाईकोर्ट ने सिविल जज कंडाघाट को मामले का शीघ्र निपटारा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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