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HP High Court : हिमाचल हाईकोर्ट के निर्देश- प्रवक्ता को ग्रांट-इन-एड दें और नियमित करें, जानें पूरा मामला

Thu, 25 Sep 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

HP High Court : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पहले पीटीए और बाद में स्कूल प्रबंधन समिति के आधार पर सेवाएं देने वाले स्कूल लेक्चरर की ग्रांट-इन-एड को स्वीकृत करें। जानें पूरा मामला...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पहले पीटीए और बाद में स्कूल प्रबंधन समिति के आधार पर सेवाएं देने वाले स्कूल लेक्चरर को बड़ी राहत दी है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए 3 जनवरी 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें विभाग ने याचिकाकर्ता की ग्रांट-इन-एड की मांग को खारिज कर दिया था।

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अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि वे याचिकाकर्ता के पक्ष में 11 मई 2018 से सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल कुनिहार में लेक्चरर (कॉमर्स) के पद पर पीटीए, एसएमसी आधार पर काम करने की अवधि के लिए ग्रांट-इन-एड को स्वीकृत करें। यह राशि न्यायालय के आदेश की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर जारी करनी होगी।

अदालत ने कहा है कि यदि आठ सप्ताह के भीतर राशि जारी नहीं की जाती है तो याचिकाकर्ता देय तिथि से 6 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज का हकदार होगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से 10 अक्तूबर 2022 को लिए गए नीतिगत निर्णय के तहत याचिकाकर्ता की सेवाओं को नियमितीकरण के लिए भी विचार किया जाए। इस नीति के तहत उन पीटीए शिक्षकों की सेवाओं को नियमित करने और ग्रांट-इन-एड जारी करने का फैसला किया गया था, जिन्हें 3 जनवरी 2008 के बाद नियुक्त किया गया था।

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याचिकाकर्ता को सबसे पहले 10 अक्तूबर 2008 को कुनिहार में पीटीए आधार पर लेक्चरर (कॉमर्स) के पद पर नियुक्त किया गया। उन्होंने 1 जुलाई 2014 तक लगातार काम किया। बाद में एक अनुबंध शिक्षक की नियुक्ति के कारण 2018 तक उनकी सेवाएं बंद रहीं। मई 2018 में पद खाली होने पर उन्हें एसएमसी की ओर से फिर से नियुक्त किया गया। याचिकाकर्ता तब से बहुत कम मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहा है। न्यायालय ने माना कि सरकार ने 10 अक्तूबर 2022 को एक नीतिगत निर्णय लिया, जिसके तहत 3 जनवरी 2008 के बाद नियुक्त पीटीए शिक्षकों को भी ग्रांट-इन-एड और नियमितीकरण का लाभ दिया गया।

याचिकाकर्ता भी 10 अक्तूबर 2008 को नियुक्त हुआ था और 13 वर्षों से अधिक समय से पढ़ा रहा है, इसलिए वह भी समान लाभ का हकदार है। न्यायालय ने कहा कि राज्य को एक मॉडल नियोक्ता के रूप में कार्य करना चाहिए न कि कम मानदेय में शोषण करना चाहिए जिसे संविधान के अनुच्छेद 23 में बंद करने को कहा गया है।
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