हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कीरतपुर-नेरचौक-मनाली फोरलेन परियोजना में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई और निजी ठेकेदार कंपनियों को काम में तेजी लाने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कंपनी के निदेशक सुनील कुलकर्णी व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से कुछ ऐसी प्रतिबद्धताएं पूरी की जानी बाकी हैं, जो उनके निर्माण क्षेत्र की सीमा से बाहर है। इस वजह से काम रुका हुआ है और इसे ठीक करना एनएचएआई की जिम्मेदारी है। इस पर कंपनी के वकील ने कोर्ट से समय मांगते हुए कहा कि वे एक व्यापक हलफनामा दायर करेंगे। इसमें उन सभी दिक्कतों और एनएचएआई को भेजे गए अनुरोध पत्रों का पूरा रिकॉर्ड दिया जाएगा, ताकि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सके।