प्रदेश में ओबीसी की आबादी 15.27 फीसदी
सरकार ने कहा कि आरक्षण आबादी के अनुपात में नहीं, बल्कि संबंधित वर्ग के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के आधार पर तय किया जाता है। प्रदेश में ओबीसी की आबादी 15.27 फीसदी यानी 9,27,542 बताई गई है। कार्मिक विभाग के अनुसार सीधी भर्ती में श्रेणी-1 और 2 के पदों पर ओबीसी को 12 फीसदी, जबकि श्रेणी-3 और 4 में 18 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है। ऐसे में मौजूदा सांविधानिक और न्यायिक व्यवस्था के तहत 27 फीसदी आरक्षण की मांग स्वीकार करना संभव नहीं बताया गया।
क्रीमी लेयर खत्म करने की मांग पर भी राहत नहीं
क्रीमी लेयर खत्म करने की मांग पर भी सरकार ने राहत नहीं दी। विभाग ने स्पष्ट किया कि क्रीमी लेयर का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद लागू हुआ है और इसे खत्म करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। हालांकि, आय सीमा में समय-समय पर संशोधन किया जा सकता है। वहीं, बैठक में ओबीसी वर्ग के युवाओं के लिए राहत की बात सामने आई। पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम ने बताया कि पांच लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले पात्र लोगों के लिए स्वरोजगार ऋण की सीमा 15 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है। शिक्षा ऋण पर ब्याज दर कम करने की मांग राष्ट्रीय निगम के समक्ष उठाने का भी आश्वासन दिया गया।
प्रमाणपत्र के प्रारूप में बदलाव पर विचार
ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता बढ़ाने की मांग पर राजस्व विभाग ने कहा कि इस संबंध में अधिकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) और केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय के अधीन है। राज्य और केंद्र के ओबीसी प्रमाणपत्र के प्रारूप को एक समान करने का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। इसके लिए लैंड रिकॉर्ड्स मैनुअल-1992 के अध्याय 28 में संशोधन करना होगा।
पांच फीसदी से कम आबादी वाले ब्लॉकों में पंचायत आरक्षण नहीं
पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर भी नियम स्पष्ट किए गए हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अनुसार, जिन विकास खंडों में ओबीसी आबादी पांच फीसदी से कम है, वहां नियमों के तहत आरक्षण का प्रावधान नहीं है। चंबा जिले का सलूणी विकास खंड इसका उदाहरण है।