लेकिन प्रदेश के अधिकांश बैरियरों पर अभी तक यह व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है, जिसका फायदा ठेकेदार उठा रहे हैं। बैरियरों पर दी जा रही पर्चियों में शुल्क का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे वाहन चालकों को वास्तविक दर की जानकारी नहीं मिल पा रही। कई मामलों में चालक विरोध भी करते हैं, लेकिन समय की कमी और विवाद से बचने के लिए मजबूरी में अधिक भुगतान करना पड़ता है। आबकारी नियमों में 12 जमा एक सीटर टैक्सी वाहनों के लिए 200 रुपये का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद दोगुना राशि वसूल कर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इससे न केवल वाहन चालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।