हालांकि इसी परिवार के लिए राहत की खबर वार्ड नंबर-चार से आई, जहां सन्नी शर्मा की पत्नी मनोरमा शर्मा ने जीत दर्ज कर परिवार की साख बचा ली। भोटा चुनाव में यह सबसे चर्चित परिणामों में शामिल रहा, जहां पति हार गए लेकिन पत्नी जीत गई। वार्ड सात में कांग्रेस नेता और नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष शरण प्रसाद भी जीत हासिल नहीं कर सके। उन्हें भाजपा समर्थित प्रत्याशी अनिल ने 27 मतों के अंतर से हराया। वहीं, उनकी पत्नी और नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष सर्वजीत कौर वार्ड नंबर-तीन से चुनाव मैदान में थीं, लेकिन बेहद करीबी मुकाबले में महज चार मतों के अंतर से जीत से चूक गईं। एक और चर्चित मुकाबला वार्ड नंबर-पांच में देखने को मिला। यहां भाजपा समर्थित प्रत्याशी ज्योति धीमान को साझा मोर्चे की रंजना कतना ने महज नौ मतों के अंतर से शिकस्त दी। ज्योति धीमान के पति और नपं के पूर्व उपाध्यक्ष संजय धीमान वार्ड सात से चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन 40 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
वहीं जोगिंद्रनगर नगर परिषद चुनाव में इस बार एक ही परिवार के दो सदस्यों ने चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई। चुनाव परिणाम में पत्नी चंद्ररेखा को जीत मिली, जबकि पति अजय को हार का सामना करना पड़ा। दंपती के चुनाव लड़ने को लेकर क्षेत्र में पूरे चुनाव के दौरान चर्चा बनी रही। नगर परिषद के अलग-अलग वार्डों में चुनाव लड़ रहे अजय और चंद्ररेखा ने अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं से समर्थन मांगा था। मतगणना के बाद घोषित परिणामों में चंद्ररेखा ने अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर जीत दर्ज की। जबकि अजय को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया।
राजधानी शिमला के साथ लगती नगर पंचायत सुन्नी के चुनाव परिणाम में इस बार चर्चित समीकरण देखने को मिला। यहां ससुर और बहू ने अलग-अलग वाड़ों से चुनाव जीतकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का परिचय दिया है। दोनों की जीत के बाद क्षेत्र में इस परिवार की चर्चा जोरों पर है। वार्ड नंबर तीन से बालादास हिमराल और वार्ड नंबर छह से उमा देवी चुनाव मैदान में उतरे थे। देर शाम रिजल्ट आए तो सभी हैरान हो गए। इन दोनों वाडों से ससुर और बहू जीतकर आए। दोनों प्रत्याशियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान रहेगा। दावा किया जा रहा है कि वार्डों में पेयजल, सड़क, सफाई व्यवस्था, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए मिलकर काम किया जाएगा।