हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे पंचायत और शहरी निकाय चुनाव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और सोशल मीडिया ने चुनावी तौर-तरीके बदल दिए हैं। इस बार पंचायत से लेकर शहरी निकाय चुनावों में एआई के साथ सोशल मीडिया नया टूल बनकर उभरा है। प्रत्याशियों ने हजारों की संख्या वाले व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं, हजारों सबस्क्राइबर वाले फेसबुक पेज को प्रचार का नया औजार बनाया है। प्रत्याशियों की खूबियों और विरोधियों की खामियों के सहारे मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा, कांग्रेस समेत सभी दल पसीना बहा रहे हैं। चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद सोशल मीडिया से प्रचार पर जोर रहेगा। यहां तक कि कुछ जिलों में तो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर खुद ही चुनाव मैदान में उतर आए हैं। चुनाव प्रत्याशी व्हाट्सएप ग्रुप समेत सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर अपनी लोकप्रियता के सहारे चुनाव जीतने की आस में हैं।
प्रचार पूरी तरह डिजटिल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो गया है। सभी प्रत्याशियों के प्रोफाइल के अनुसार रणनीति बनाकर प्रचार किया जा रहा है। सीएम से लेकर तमाम मंत्री, विधायक, महिला, यूथ कांग्रेस जैसे संगठन फील्ड में हैं। प्रिंटिंग के खर्च में 70 फीसदी तक कमी आई है। - हरिकृष्ण हिमराल, प्रदेश कांग्रेस महासचिव
सोशल मीडिया और एआई को मजबूत टूल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए पार्टी ने राज्य ऑफिस समेत नगर निगम चुनाव के लिए चार वार रूम बनाए हैं। प्रत्याशियों की खूबियां और विरोधियों की कमियों का प्रचार कर रहे हैं।अभी शहरी चुनावों पर फोकस है।- बिहारी लाल शर्मा, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष