साइबर अपराधियों द्वारा खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर ठगी करने के लिए इस्तेमाल होने वाली वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) से की जाने वाली फेक कॉल की जांच होगी। नकली डिजिटल पहचान से की जानी वाली कॉल की सीबीआई निगरानी करेगी।
पिछले कुछ समय से साइबर अपराधी व्हाट्सऐप, वीडियो कॉल, ईमेल और फर्जी फोन नंबरों का सहारा लेकर लोगों को जांच में फंसाने का डर दिखा कर भारी रकम वसूल रहे हैं। कुछ मामलों में शातिर एआई जनरेटेड समन, नकली वारंट, फर्जी आईडी कार्ड, डीप फेक आवाज और वीडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सीबीआई ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है और स्पष्ट किया है कि सीबीआई कभी व्हाट्सऐप या किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नोटिस, समन या वारंट नहीं भेजती और न ही किसी से पैसे मांगती है। किसी संदिग्ध कॉल या मैसेज का जवाब न देने और तुरंत उसे रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राज्य साइबर अपराध शिमला, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो और जाने माने साइबर अपराध अन्वेषक नरवीर सिंह राठौर ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश साइबर पुलिस वीओआईपी फ्रॉड, डीप फेक तकनीक, एआई से दस्तावेज बनाने वाले गिरोह पर कड़ी नजर रखी जा रही है। कोई भी सीबीआई, पुलिस अधिकारी ऑनलाइन पैसे नहीं मांगता। ऐसी कोई कॉल आए तो तुरंत फोन काट कर 1930 पर शिकायत करें।