यह जलमार्ग नयनादेवी से बाबा बालक नाथ मंदिर, दियोटसिद्ध तक जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बना देगा। वर्तमान में इस रूट पर श्रद्धालुओं को लगभग 80 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, लेकिन केबल फेरी के शुरू होते ही यह दूरी कुछ ही मिनटों की रह जाएगी। इस फेरी में न केवल यात्री, बल्कि कार, जीप, बाइक और स्कूटर जैसे छोटे वाहन भी एक किनारे से दूसरे किनारे आसानी ले जा सकेंगे। फेरी को केबल के सहारे खींचा जाएगा, जिसका कुछ हिस्सा पानी पर तैरेगा और कुछ हिस्सा केबल पर संतुलित रहेगा।
इस तकनीक से संचालन में ईंधन की जरूरत नहीं होगी, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा। परियोजना की कुल लागत करीब 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इससे पहले श्री नयना देवी आने वाले श्रद्धालु माथा टेककर यहीं से वापस चले जाते थे, लेकिन केबल फेरी शुरू होने के बाद उनका बाबा बालक नाथ, दियोट सिद्ध जाना आसान हो जाएगा। इससे जहां धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं स्थानीय रोजगार से साधन भी बढ़ेंगे। विशेषज्ञों और तकनीकी टीम की ओर से 28 लाख से डीपीआर तैयार की जा रही है।
यह परियोजना बिलासपुर जिले में पर्यटन और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गोबिंद सागर झील, ऐतिहासिक धरोहरों और तीर्थ स्थलों के संगम से क्षेत्र का पर्यटन नक्शा बदल सकता है। -राजेश धर्माणी, तकनीकी शिक्षा मंत्री, हिमाचल सरकार