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हिमाचल: डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ बैंक बनेंगे पहली सुरक्षा दीवार, पुलिस देगी साथ

Tue, 08 Sep 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 पुलिस अब बैंकों के साथ मिलकर साइबर ठगी की रकम खातों से बाहर जाने से रोकने पर जोर देगी। डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के कारण यह समन्वित व्यवस्था मजबूत की जा रही है। 
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पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल पुलिस अब बैंकों के साथ मिलकर साइबर ठगी की रकम खातों से बाहर जाने से रोकने पर जोर देगी। डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के कारण यह समन्वित व्यवस्था मजबूत की जा रही है। हमीरपुर में पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों की सतर्कता से 78 वर्षीय बुजुर्ग की 70 लाख रुपये की जमा-पूंजी बची। साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट में पीड़ित को फोन या वीडियो कॉल पर नियंत्रण में रखते हैं। वे पुलिस अधिकारी, सीबीआई या ईडी बनकर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। ठग खाते में रकम जमा करने या दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश देते हैं। ऐसे मामलों में बैंक शाखा पीड़ित और ठग के बीच अंतिम सुरक्षा दीवार बन सकती है। पुलिस और बैंक मिलकर एक नया तंत्र तैयार करेंगे। इस तंत्र में बैंक कर्मचारी अतिरिक्त सतर्कता बरतेंगे। वे खाते से अचानक बड़ी रकम निकालने, एफडी तोड़ने या असामान्य तरीके से धनराशि ट्रांसफर करने के प्रयास पर ध्यान देंगे। ग्राहक के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखने पर उससे बातचीत कर वास्तविक स्थिति समझेंगे।

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जरूरत पड़ने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत साइबर पुलिस को तत्काल सूचना दी जाएगी। पुलिस और बैंक अधिकारियों के बीच नियमित समन्वय स्थापित होगा। बैंक कर्मचारियों को डिजिटल अरेस्ट के संकेत पहचानने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें बुजुर्ग खाताधारकों के लेनदेन और फोन पर अज्ञात निर्देशों पर ध्यान देने की जानकारी होगी। कर्मचारियों को पीड़ित से विश्वास में लेकर संवेदनशील तरीके से बातचीत करना सिखाया जाएगा। जिला स्तर पर पुलिस और प्रमुख बैंकों के नोडल अधिकारियों के बीच संपर्क व्यवस्था बनेगी। साइबर ठगी के नए तरीकों और संदिग्ध खातों के पैटर्न की जानकारी साझा की जाएगी। बैंक शाखाओं में यह स्पष्ट संदेश दिया जाएगा। कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। न ही गिरफ्तारी से बचने के लिए खाते में रकम जमा करने को कहती है। प्रदेश पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी का कहना है कि साइबर ठगों की ओर से किए जाने वाले डिजिटल अरेस्ट के मामलों में यदि बैंक कर्मी सतर्कता बरते तो प्रभावितों को वित्तीय नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता है। बैंक प्रबंधन और पुलिस इसे लेकर साझा कार्ययोजना तैयार करेंगे।
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