हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही तीन बजे के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर बाद दो बजे शुरू हुई सदन की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपनी-अपनी बातें रखने पर जोर दिया गया तो स्पीकर दोनों पक्षों को नियमों का हवाला देते हुए रोकते रहे। दबाव बनता देख और न मानने पर उन्होंने पौने घंटे के लिए यानी तीन बजे तक सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
दो बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्ष के विधायक त्रिलोक जम्वाल ने आबकारी नीति से संबंधित सवाल को सूची से हटाए जाने का विरोध किया। वह इस बात पर अड़े रहे कि यह प्रश्न सोमवार को लगना था लेकिन इसे कार्यवाही से हटा दिया गया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने नियम 53 का हवाले देते हुए कहा कि इस प्रश्न को लोप नहीं किया गया है। यह मंगलवार को लगेगा। इस बारे में सरकार को सूचना भेजने को कहा जाएगा। जम्वाल ने कहा कि उन्होंंने आबकारी नीति के बारे में जानकारी देने को कहा था। दो साल से प्रश्न लगाया जा रहा है लेकिन उत्तर में आता है कि सूचना एकत्र की जा रही है। अब तो प्रश्न को सूची से हटा दिया गया। विधानसभा से सूचना एकत्र किए जाने का जवाब आ रहा है। वह आरटीआई एक्ट में एकत्र की गई सूची को सदन में दे सकते हैं। इस पर राज्य विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि प्रश्न को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यह विधानसभा अध्यक्ष पर ही निर्भर करता है कि प्रश्न की मंजूरी दी जाए या नहीं।
सवालों के जवाब नहीं दिए जा रहे, विधायक कहां जाएं : जयराम
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि जब विधायक प्रश्न लगाते हैं तो विधानसभा सचिवालय की ओर से उन्हें स्वीकार किया जाता है। इसके बाद सूचना आती है कि संबंधित प्रश्न की सूचना एकत्रित की जा रही है, लेकिन सोमवार की कार्यवाही से ही सूचना को गायब कर दिया गया। जबकि विपक्ष के विधायक ने आरटीआई में अपने प्रश्न की जानकारी प्राप्त कर ली है। अगर विधानसभा में विधायकों के सवालों के जवाब नहीं दिए जाने हैं तो ऐसी स्थिति में विधानसभा के सदस्य कहां जाएंगे। यह विधानसभा के ऊपर भी बहुत बड़ा प्रश्न है। वह समझते हैं कि यह विपक्ष के अधिकारों के ऊपर बहुत बड़ा कुठाराघात है। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि ऐसे किसी भी प्रश्न का विलोप नहीं किया जाएगा। विश्वास रखें कि मंगलवार का दिन भी है। सूचना एकत्र की जा रही है। अगर मंगलवार को नहीं किया जाता है तो इस पर एक्शन लें।
इसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू आपदा पर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि कहा कि विपक्ष की ओर से ही नियम 67 के तहत काम रोको प्रस्ताव लेकर आया था, उसे मंजूर किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह आपदा पर वक्तव्य देना चाहते हैं, उन्हें भी इसकी अनुमति मिलनी चाहिए। विपक्ष को छूट दी जा रही है तो उन्हें भी दी जाएं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रश्नकाल खत्म होने के बाद वह अपनी बात रख सकते हैं। इस बीच दोनों तरफ से सदन में नोकझोंक बढ़ी तो विधानसभा अध्यक्ष ने बैठक को तीन बजे के लिए स्थगित कर दिया।