2007 में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था विवाह
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार दोनों का विवाह वर्ष 2007 में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। दंपती की कोई संतान नहीं है। पति ने याचिका में आरोप लगाया कि विवाह के कुछ समय बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया। वह परिवार के साथ दुर्व्यवहार करती थी, वैवाहिक जिम्मेदारियां नहीं निभाती थी और बिना बताए घर से छोड़कर चली जाती थी। वर्ष 2010 में वह घर छोड़कर चली गई और दोबारा साथ रहने से इनकार कर दिया।
कई बार समझौते के प्रयास किए गए
पति ने बताया कि पंचायत स्तर पर कई बार समझौते के प्रयास किए गए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद उसने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान पत्नी लगातार अदालत में उपस्थित नहीं हुई, जिसके कारण मामला एकतरफा (एक्स-पार्टी) चला। अपने फैसले में अदालत ने कहा कि पति ने क्रूरता और परित्याग के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए, जबकि पत्नी की ओर से उनका कोई प्रतिवाद नहीं किया गया। ऐसे में विवाह को समाप्त करते हुए तलाक की डिक्री पारित की गई।