नाचन, सराज, द्रंग और मंडी सदर विस क्षेत्रों को पंडोह ही जोड़ता है। द्रंग के लोग पहले लाल पुल से दो किमी का सफर कर पंडोह पहुंच जाते थे। अब दस किमी घूमकर डैम से होकर पंडोह आना पड़ता है। मरम्मत के लिए लाडा के नाम पर हर साल करीब 40 लाख रुपये मिलते हैं लेकिन मौके पर लगता है कि फूटी कौड़ी भी नहीं खर्च की गई। लोग बताते हैं कि 2023 में बाढ़ आई तो 15 मिनट में सब जलमग्न हो गया। शासन-प्रशासन, नेताओं सहित केंद्रीय टीमें पहुंचीं। दिलासा मिला। सुरक्षा के दावे भी किए। धरातल पर पानी इन दावों की हवा कब निकाल दे, कुछ नहीं कह सकते।
यही हाल कुल्लू की सैंज घाटी की पिन पार्वती नदी में 520 मेगावाट की पार्वती जल विद्युत परियोजना और 100 मेगावाट की सैंज जल विद्युत परियोजना के दो डैम के आसपास भी है। आरोप है कि डैम से बिना पूर्व सूचना दिए पानी भारी मात्रा में छोड़ा जा रहा है। इससे नुकसान हो रहा है। बीते तीन सालों से दर्जनों घर और सैकड़ों बीघा जमीन बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं। पार्वती परियोजना के महाप्रबंधक प्रकाश चंद ने बताया कि प्राकृतिक आपदा के अलावा परियोजना से कोई नुकसान नहीं हुआ है। नियमों के अनुसार पानी छोड़ा जा रहा है।
2023 के उस जलप्रलय को याद नहीं करना चाहता। शासन-प्रशासन से लेकर केंद्र से टीमें पहुंचीं। सुरक्षा के नाम पर दिलासा तो मिला पर 19 महीने बाद भी धरातल पर कुछ नहीं हुआ। बरसात आते ही दहशत का माहौल बन जाता है- खोवेंद्र कटोच, कारोबारी
नियमानुसार बांध से पानी छोड़े जाने का तय पैमाना होता है। सैंज घाटी में इन मानकों पर अमल नहीं हो रहा। तबाही के बाद यहां अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं जबकि यह व्यवस्था पहले कर दी जानी चाहिए थी- शेर सिंह नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता, सैंज
सुरक्षा दीवार के लिए 11 करोड़ रुपये का टेंडर लगाया गया है। रिहायशी क्षेत्र में भी सुरक्षा को लेकर कई प्रस्ताव भेजे गए हैं। आपदा से बचाव के लिए मॉकड्रिल प्रशासन की देखरेख में होती है- चंद्रमणी शर्मा, अधिशाषी अभियंता, बीबीएमबी
लारजी बांध परिसर में 24 घंटे सुरक्षा रहती है। यहां एक्ससर्विसमैन सुरक्षा में तैनात हैं। सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं- संजय कौशल, चीफ इंजीनियर उत्पादन बिजली बोर्ड